अबू धाबी
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपने बढ़ते वैज्ञानिक सहयोग को अंटार्कटिका तक ले जाते हुए, अमीराती शोधकर्ताओं को भारत के 45वें अंटार्कटिक अभियान में शामिल किया है। भारतीय दूतावास के अनुसार, यूएई के खलीफा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भारतीय मैत्री रिसर्च स्टेशन पर काम कर रहे हैं।
साझा टीम अंटार्कटिका के चरम और मंगल जैसी परिस्थितियों वाले भू-भाग का अध्ययन कर रही है, ताकि ध्रुवीय विज्ञान और ग्रह विज्ञान में शोध को बढ़ावा दिया जा सके। यह सहयोग दोनों देशों के जलवायु अनुसंधान, पृथ्वी विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े अध्ययनों में गहरी साझेदारी का प्रतीक है।
भारतीय दूतावास ने X पोस्ट में लिखा, “खलीफा विश्वविद्यालय के अमीराती शोधकर्ता भारत के 45वें अंटार्कटिक अभियान में मैत्री स्टेशन पर शामिल हुए और अंटार्कटिका के मंगल जैसी परिस्थितियों का अध्ययन कर ध्रुवीय और ग्रह विज्ञान को आगे बढ़ा रहे हैं।”
यूएई वैज्ञानिकों की भागीदारी उस समझौते के तहत हुई है, जिसे भारत और यूएई ने ध्रुवीय अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने के लिए किया था। 13 दिसंबर, 2024 को दोनों देशों ने एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान में सहयोग बढ़ाना था। यह समझौता यूएई पोलर प्रोग्राम और भारत के नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR) के बीच 15वीं संयुक्त समिति की बैठक में हुआ।
समझौते पर हस्ताक्षर यूएई के सहायक मंत्री अब्दुल्ला बलाला और भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव म. रवीचंद्रन ने किए। इसका मकसद है कि दोनों देश अंटार्कटिक और आर्कटिक मिशनों में सहयोग, डेटा साझा करना, और जलवायु परिवर्तन, ध्रुवीय पारिस्थितिकी तंत्र और पृथ्वी प्रणाली विज्ञान में शोध को बढ़ावा दें।
यूएई का पोलर प्रोग्राम अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीय मिशनों में भाग लेने और वैश्विक जलवायु कार्रवाई में योगदान देने पर केंद्रित है। भारत के सहयोग के माध्यम से, यूएई ध्रुवीय पर्यावरणों की बेहतर समझ विकसित करने के साथ-साथ वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को भी मजबूत कर रहा है।
इस अभियान से भारत-यूएई सहयोग न केवल वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्रुवीय और जलवायु अनुसंधान में साझेदारी को भी सुदृढ़ करेगा।