रियाद
सऊदी अरब ने एक बार फिर जोर देकर कहा है कि क्षेत्रीय तनाव कम करने और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत में प्रगति की खबरें सामने आ रही हैं।
जेद्दा में मंत्रिपरिषद की साप्ताहिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए सऊदी क्राउन प्रिंस एवं प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि तनाव कम करने और युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ने के लिए संवाद को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि कूटनीतिक समाधान का रास्ता खुल सके।
बैठक के दौरान क्राउन प्रिंस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सप्ताहांत में हुई अपनी टेलीफोन वार्ता की भी जानकारी मंत्रिमंडल को दी। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) के अनुसार, उन्होंने बातचीत में भी यही रुख दोहराया कि क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए सभी पक्षों को संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए।
इस बीच, अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और जल्द ही एक नई सहमति बन सकती है। यदि ऐसा होता है तो रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से समुद्री यातायात के लिए खोला जा सकता है।
गौरतलब है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए पहले के एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के विफल होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
बैठक में सऊदी मंत्रिमंडल ने हाल ही में गठित बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन (Multinational Maritime Defense Coalition) को मिल रहे अंतरराष्ट्रीय समर्थन का भी स्वागत किया। सऊदी अरब और 13 अन्य देशों ने पिछले सप्ताह इस गठबंधन की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य मध्य-पूर्व के प्रमुख समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह गठबंधन समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की रक्षा करने तथा समुद्री नौवहन के सामने बढ़ते खतरों का सामूहिक रूप से मुकाबला करने के लिए बनाया गया है।
सऊदी प्रेस एजेंसी ने कहा कि यह पहल क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने में सऊदी अरब की अग्रणी भूमिका को दर्शाती है। साथ ही, यह सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने और लाल सागर, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य तथा अदन की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।