इजरायल में यहूदी-अरब सरकार के समर्थन में प्रदर्शन, तेल अवीव समेत तीन शहरों में जुटे लोग

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 29-10-2026
Demonstrations in support of a Jewish-Arab government in Israel; people gather in three cities, including Tel Aviv.
Demonstrations in support of a Jewish-Arab government in Israel; people gather in three cities, including Tel Aviv.

 

यरुशलम

इजरायल में यहूदी और अरब समुदायों की भागीदारी वाली सरकार के गठन की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। इजरायली अखबार हारेत्ज के मुताबिक, यरुशलम, तेल अवीव और हाइफा में करीब 300 लोग जुटे और समावेशी सरकार बनाने की मांग उठाई।

प्रदर्शनकारियों ने यरुशलम के पेरिस स्क्वायर, तेल अवीव के मेसिला पार्क और हाइफा के यूनेस्को स्क्वायर में एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। उनके हाथों में कई तरह की तख्तियां थीं। इनमें ‘नदी से समुद्र तक सभी के लिए आजादी’ और ‘यहूदी-अरब सरकार के समर्थन में’ जैसे नारे लिखे थे।

प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि देश में ऐसी सरकार बने, जिसमें यहूदी और अरब समुदायों की भागीदारी हो। इन प्रदर्शनों के बीच इजरायल में चुनावी नतीजों को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं।

चुनावी आंकड़ों में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मुकाबला

इजरायल में जारी मतगणना के शुरुआती आंकड़ों ने राजनीतिक तस्वीर को दिलचस्प बना दिया है। केंद्रीय निर्वाचन समिति के आंशिक आंकड़ों के अनुसार, स्थानीय समयानुसार रात 11:35 बजे तक करीब 90 प्रतिशत मतों की गिनती हो चुकी थी। यह आंकड़ा 97.5 प्रतिशत मतदान केंद्रों के आधार पर जारी किया गया था।

द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थक गठबंधन को 53 सीटें मिलती दिखाई गईं, जबकि उनके विरोधी खेमे के खाते में 48 सीटें थीं।

हालांकि, विरोधी खेमे के कुल संभावित समर्थन में अरब नेतृत्व वाले दलों की 19 सीटें भी शामिल बताई गई हैं। इस तरह नेतन्याहू विरोधी खेमे के पास कुल 67 सीटों का संभावित समर्थन है, लेकिन यह संख्या अलग-अलग राजनीतिक समूहों में बंटी हुई है।

इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है। ऐसे में केवल सीटों के आंकड़े ही नहीं, बल्कि गठबंधन की संभावनाएं भी निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

कई दल चुनावी सीमा से नीचे

मतगणना के शुरुआती रुझानों में कुछ राजनीतिक दल निर्धारित चुनावी सीमा से नीचे चल रहे हैं। इनमें रिजर्विस्ट्स को 2.6 प्रतिशत, पीपुल ऑफ इजरायल को 1.6 प्रतिशत और हरेदी पब्लिक धड़े को 0.2 प्रतिशत वोट मिलने की बात सामने आई।

इजरायल में संसद में प्रतिनिधित्व हासिल करने के लिए किसी दल को कम से कम 3.25 प्रतिशत मत प्राप्त करना जरूरी है। इस सीमा से नीचे रहने वाले दलों की अंतिम स्थिति चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।

निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े आंशिक हैं और मतगणना आगे बढ़ने के साथ बदल सकते हैं। दोहरे लिफाफों में डाले गए मतों की गिनती बाद के चरणों में होती है। इनमें सक्रिय सैन्यकर्मियों के वोट भी शामिल होते हैं। इसलिए अंतिम सीटों का बंटवारा अभी तय नहीं माना जा सकता।

गादी आइजेनकोट ने नेतन्याहू सरकार पर साधा निशाना

विपक्ष के प्रमुख नेता और याशर पार्टी के अध्यक्ष गादी आइजेनकोट ने चुनावी परिणामों को प्रधानमंत्री नेतन्याहू सरकार के खिलाफ अविश्वास का स्पष्ट संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि जनता ने 7 अक्टूबर की घटनाओं और सैन्य भर्ती से बचने के मुद्दे पर सरकार के प्रति अपना असंतोष जाहिर किया है। आइजेनकोट ने नेतन्याहू और उनके सहयोगियों पर निशाना साधते हुए सरकार को हटाने की कोशिश जारी रखने का संकल्प जताया।

एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि आगे लंबा राजनीतिक संघर्ष है, लेकिन उनका ध्यान इजरायल में बदलाव लाने और सैन्य भर्ती के प्रति प्रतिबद्ध सरकार स्थापित करने पर है।

विपक्ष के सामने हालांकि सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक एकजुटता की है। यहूदी नेतृत्व वाले विपक्षी दलों के पास 48 सीटें बताई गई हैं, जबकि अरब नेतृत्व वाले दलों के पास 19 सीटें हैं। विपक्ष के कई यहूदी नेतृत्व वाले दल अरब दलों के साथ गठबंधन बनाने को लेकर अनिच्छा जता चुके हैं।