भारत के साथ हुए 101 समझौतों की समीक्षा का मकसद उन्हें 'दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद' बनाना है: बांग्लादेश

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 19-09-2026
Bangladesh says review of 101 India pacts aimed at making agreements ‘win-win’
Bangladesh says review of 101 India pacts aimed at making agreements ‘win-win’

 

ढाका [बांग्लादेश]

बांग्लादेश के मुख्य सचेतक (चीफ़ व्हिप) नुरुल इस्लाम मोनी ने कहा कि भारत के साथ हुए 101 समझौतों और सहमति पत्रों (MoU) की समीक्षा का मकसद कमियों या विसंगतियों की पहचान करना और उन्हें दूर करना है, ताकि ये समझौते दोनों देशों के हितों को पूरा कर सकें। शुक्रवार देर रात ANI से फोन पर बात करते हुए मोनी ने कहा कि अलग-अलग समय पर भारत के साथ हुए समझौतों को रद्द करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि समीक्षा के बाद बांग्लादेश के हितों के खिलाफ पाए जाने वाले प्रावधानों को हटा दिया जाएगा।
 
मोनी ने कहा, "हम भारत के साथ हुए समझौतों की समीक्षा करेंगे ताकि यह देखा जा सके कि कहीं कोई विसंगति तो नहीं है। अगर ऐसी कोई विसंगति मिलती है, तो हम उसे सुलझाने की कोशिश करेंगे।" उन्होंने आगे कहा, "बांग्लादेश के संबंधित मंत्रालय और विभाग मौजूदा समझौतों की समीक्षा करेंगे ताकि विसंगतियों का पता लगाया जा सके। अगर ऐसी विसंगतियां मिलती हैं, तभी उन्हें दूर करने के लिए भारत के साथ बातचीत की जाएगी।" मोनी ने पिछले हफ्ते कहा था कि सरकार पिछली अवामी लीग सरकार के दौरान भारत के साथ हुए 101 MoU और समझौतों की समीक्षा कर रही है और इस प्रक्रिया का नतीजा जल्द ही घोषित किया जाएगा।
 
मोनी ने कहा था, "हम उन समझौतों की समीक्षा कर रहे हैं जिनमें 101 MoU शामिल हैं, और आपको इसका (समीक्षा का) नतीजा जल्द ही मिल जाएगा।" यह समीक्षा ऐसी खबरों के बीच हो रही है कि बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए द्विपक्षीय समझौतों की जांच कर रहा है, जिनमें कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे और सहयोग के अन्य क्षेत्रों से जुड़े समझौते शामिल हैं। नई दिल्ली ने इन खबरों पर ध्यान दिया है, लेकिन कहा है कि उसे इस मामले पर ढाका से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
 
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को हर दो हफ्ते में होने वाली प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, "हमने भी इस मामले पर कुछ मीडिया रिपोर्ट देखी हैं, लेकिन हमें आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं बताया गया है। जाहिर है, भारत अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।"
 
भारत-बांग्लादेश के पिछले समझौतों में शामिल क्षेत्रों में बांग्लादेश के रास्ते कनेक्टिविटी भी है, जिसमें भारत द्वारा अपने पूर्वोत्तर राज्यों तक सामान पहुंचाने के लिए चट्टोग्राम और मोंगला बंदरगाहों का इस्तेमाल शामिल है। बताई जा रही समीक्षा में मौजूदा शर्तों और व्यवस्थाओं की जांच-पड़ताल शामिल है।
 
ऊर्जा सहयोग द्विपक्षीय जुड़ाव का एक और अहम क्षेत्र है। बांग्लादेश आयातित बिजली और सीमा-पार ईंधन व्यवस्थाओं पर निर्भर है। मिली जानकारी से पता चलता है कि बांग्लादेश में विदेशी मुद्रा की कमी के कारण बिजली खरीद के कुछ समझौतों में भुगतान में देरी हुई है और वित्तीय शर्तों पर फिर से बातचीत करने के अनुरोध किए गए हैं। भारत ने बांग्लादेश में रेल, सड़क और बंदरगाह प्रोजेक्ट्स के लिए कई 'लाइन ऑफ़ क्रेडिट' के ज़रिए 7 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा की मदद दी है। भारत की मदद से चल रहे कई प्रोजेक्ट्स की बांग्लादेश के प्लानिंग अधिकारियों ने व्यवहार्यता (feasibility) की समीक्षा की है; इस समीक्षा प्रक्रिया का असर प्रोजेक्ट्स को लागू करने और फंड के इस्तेमाल पर पड़ सकता है।
 
साझा सीमा पर सुरक्षा सहयोग भी दोनों देशों के रिश्तों का एक अहम हिस्सा रहा है।
पिछली अवामी लीग सरकार के दौरान, बांग्लादेश ने भारत विरोधी विद्रोही गुटों को अपनी ज़मीन से काम करने से रोकने में भारत का सहयोग किया था। सीमा सहयोग में सीमा-पार तस्करी, अवैध प्रवास और उग्रवादी गतिविधियों जैसे मुद्दे भी शामिल रहे हैं। बांग्लादेश का कहना है कि इस समीक्षा का मतलब मौजूदा समझौतों को पूरी तरह रद्द करना नहीं है। इसके बजाय, संबंधित मंत्रालय और विभाग अलग-अलग व्यवस्थाओं की जांच करेंगे और केवल उन मामलों में भारत के साथ बातचीत करेंगे जहाँ कोई विसंगति या कमी पाई जाएगी।