कोलकाता में अखबारों के पन्नों से सजा अनोखा दुर्गा पूजा पंडाल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 19-10-2026
A unique Durga Puja pandal in Kolkata adorned with pages from newspapers.
A unique Durga Puja pandal in Kolkata adorned with pages from newspapers.

 

जावेद अख्तर/ कोलकाता

कोलकाता में दुर्गा पूजा का उत्साह हर साल अलग ही रंग में नजर आता है। इस बार शहर के बागईआती रेल पुुकुर यूनाइटेड क्लब ने अपनी कला और थीम से सबको हैरान कर दिया है।क्लब इस साल अपना 73वां वर्ष मना रहा है।इस मौके पर वहां ‘कोलाज’ थीम पर आधारित एक अद्भुत पंडाल तैयार किया गया है।इस पंडाल को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं।इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह से पुराने और रीयूज किए गए अखबारों से बनाया गया है।

इस नायाब कला के पीछे जाने-माने कलाकार सोमनाथ तमीली की सोच है।उन्होंने पुरानी यादों और आधुनिकता को बहुत ही सुंदर तरीके से एक साथ जोड़ा है।पंडाल के उद्घाटन समारोह में पश्चिम बंगाल सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, विधायक तरुणज्योति तिवारी और कई अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।सबने इस नायाब कला की खुलकर तारीफ की है।

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अखबारों के बंडल और साइकिल की पुरानी यादें

जब आप इस पंडाल के अंदर जाएंगे तो आपको अपने बचपन के दिन याद आ जाएंगे।यहाँ सुबह-सुबह घर पर अखबार फेंके जाने और साइकिल पर अखबार बांटने वाले हॉकरों की याद को बहुत करीने से जीवंत किया गया है।

आज के डिजिटल दौर में जहां सब कुछ मोबाइल स्क्रीन पर सिमट गया है, वहां पुराने प्रिंट मीडिया के दौर को याद करना एक अलग अहसास कराता है।हजारों किलो रीयूज किए गए अखबारों की मदद से इस पूरे स्ट्रक्चर को खड़ा किया गया है।यह सिर्फ कला नहीं है बल्कि पर्यावरण बचाने का एक बेहतरीन संदेश भी है।

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पौराणिक कथाओं और महान विभूतियों को सम्मान

इस ‘कोलाज’ थीम का मुख्य आधार एकता और मेलजोल है।जिस तरह पौराणिक कथाओं में मां दुर्गा की शक्ति कई देवी-देवताओं की ऊर्जा के मिलने से प्रकट हुई थी, ठीक उसी तरह समाज के अलग-अलग तत्वों के मिलने से एक मजबूत राष्ट्र बनता है।

पंडाल में बंगाल की संस्कृति और इतिहास के महान नायकों को भी याद किया गया है।यहाँ रबीन्द्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सत्यजीत रे, सत्येंद्र नाथ बोस, मातंगिनी हाजरा, ईश्वर चंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद जैसे दिग्गजों के योगदान को बेहद कलात्मक ढंग से दिखाया गया है।

क्लब के पूजा सचिव पिंटू भट्टाचार्य ने बताया कि उनका यह 73वां साल इस बात का प्रतीक है कि कैसे अलग-अलग विचार मिलकर एक मजबूत और स्थायी समाज बनाते हैं।उनका उद्देश्य मां दुर्गा की पौराणिक कथा को आज के समय और अपनी संस्कृति से जोड़ना था।अखबारों के जरिए उन्होंने लोगों को यह याद दिलाने की कोशिश की है कि कैसे कभी प्रिंट मीडिया हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा हुआ करता था।

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पर्यावरण की सुरक्षा और लोगों की भीड़

आज के समय में जब प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन गया है, तब इस क्लब ने पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल करके एक मिसाल पेश की है।पंडाल में इस्तेमाल हुआ हर एक कागज और सामान इस बात की गवाही देता है कि कला के साथ प्रकृति का ध्यान कैसे रखा जा सकता है।

कोलकाता की इस ऐतिहासिक और पारंपरिक पूजा में शामिल होने के लिए हर रोज हजारों की संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसा पंडाल उन्होंने पहले कभी नहीं देखा, जहां कागज के टुकड़ों और पुरानी यादों के सहारे इतना भव्य रूप दिया गया हो। यह पंडाल न सिर्फ आंखों को सुकून देता है बल्कि दिल को भी छू लेता है।अगर आप भी कोलकाता में हैं तो इस अनोखे अनुभव को मिस न करें।