सीलमपुर में बकरीद पर कुर्बानी और सफाई के लिए मदरसों की अनुकरणीय पहल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 13-06-2024
Exemplary initiative of madrasas for sacrifice and cleanliness on Bakrid in Seelampur
Exemplary initiative of madrasas for sacrifice and cleanliness on Bakrid in Seelampur

 

इमरान खान / नई दिल्ली

दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाके सीलमपुर में बकरीद के दिनों में कुर्बानी और साफ-सफाई में कोताहियों के कारण आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए इलाके मदरसे ने सराहनीय पहल की है. नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से मिलकर कई ऐसे इंतजाम किए हैं, जिससे समाज में अच्छा संदेश जाएगा.

सीलपुर में कबाड़ का काम करने वाले दिलीप चैधरी ने इसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि बकरीद पर कुर्बानी और साफ-सफाई को लेकर ऐसी व्यवस्था हर जगह होनी चाहिए, इसे समाज मंे अच्छा संदेश जाता है.

कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बकरीद के दिनों मंे अव्यवस्था फैलाने वालों को कड़ी चेतावनी दी थी. यहां तक कहा था कि कुर्बानी वहीं की जाए, जो जगह पहले से निर्धारित है और पशु बलि देते समय साफ-सुथराई का विशेष ख्याल रखा जाए.

दिल्ली प्रशासन की ओर से ऐसे सख्त निर्देश आएं, इससे पहले ही सीलमपुर के मदरसों ने ठोस इंतजाम कर लिए हैं.बता दें कि मुस्लिम समाज के प्रमुख त्योहारों में से एक बकरीद जिसे ईद-उल-अजहा भी कहा जाता है, को प्रेम और त्याग का प्रतीक माना जाता है.

इस मौके पर पशुओं की कुर्बानी की परंपरा है. इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, साल के आखिरी महीने के चांद दिखने के बाद 10 तारीख को बकरीद मनाई जाती है. इस साल 17 जून को बकरीद मनाई जाएगी.

बकरीद पर सीलमपुर में कुर्बानी और साफ-सफाई की क्या व्यवस्था है ? मुस्लिम इदारे, मस्जिदें इसमें किस तरह की भूमिका अदा कर रहे हैं ? यह जानने के लिए आवाज द वाॅयस संवाददाता ने जब इलाके का दौरा किया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.

सीलमपुर के मदरसा सैयदना उमर फारूक के काजी उमर फारूक से जब इस सिलसिले में मुलाकात हुई तो उन्हांेने बताया, ‘‘ उनका मदरसा छोटा है. इसके पास कोई ऐसी जगह नहीं कि मदरसे में कुर्बानी कराई जा सके. इसलिए कुर्बानी के लिए किराए पर  जगह ली गई, ताकि किसी को परेशानी न हो और किसी तरह का व्यवधान न फैले.  

उन्होंने कहा कि हमने जगह को लेकर खास ध्यान रखा है. यह चारों तरफ से बंद है ताकि किसी भी व्यक्ति को  कुर्बानी देखने से तकलीफ न हो. उन्होंने कहा कि हमारा फर्ज है कि ऐसी बातों से बचें.

उन्होंने बताया कि पशु से निकले वाले अवशेषों और गंदगी को निजी सफाई कर्मचारियों से उठवाकर सीलमपुर के ए ब्लॉक के कूड़ेदान में डलवा की व्यवस्था की गई. वहां से गंदगी नगर निगम वाले उठा ले जाएंगे.

इसी तरह की व्यवस्था बाबुल उलूम मदरसा ने की है. यह मदरसा दिल्ली के बड़े मदरसों में से एक है. यहां मौलाना मोहम्मद दाऊद अमिनी ने बताया कि बकरीद से पहले ही उनकी ओर से आस-पास की नालियां साफ करवा दी गई हैं.

यह काम तीन से चार दिन तक लगातार चला. नालियों की सफाई और निकासी की अच्छी व्यवस्था होने से कुर्बानी से निकलने वाली गंदगी आसानी से पानी के साहरे बड़े सीवरों में चली जाएगी.

मौलाना ने आगे बताया, ‘‘ चूंकि यह बड़ा मदरसा है, इसलिए उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है. उन्होंने बताया कि उनके मदरसे में लोग काफी दूर से कुर्बानी देने आते हैं. मदरसे में एक काफी बड़ा हॉल है जिसमें पशुओं की कुर्बानी की व्यवस्था की गई है.

उन्होंने बताया कि बकरीद को देखते हुए मदरसे की ओर से किराए पर कई लोग रखे गए हैं ताकि कुर्बानी से लेकर पशुओं के अवशेष और   गंदगी को ठिकाने लगाया जा सके.उन्होंने कहा कि नाली की सफाई कराने से कुर्बानी देते समय निकलने वाला खून जल्दी बड़े सीवर में चला जाएगा. इससे आम लोग परेशानी नहीं होंगे.

इसके अलावा स्थानीय निकाय के अधिकारियों से मिलकर कहा गया कि सफाई गाड़ियों की सीलमपुर इलाके में चक्कर बढ़ाई जाए. कुर्बानी से होने वाली गंदगी किसी के लिए समस्या न बने. खुले में गंदगी छोड़ने से पूरे वातावरण में बदबू फैल जाती है.

मौलाना मोहम्मद दाऊद अमिनी आगे कहते हैं,‘‘ जुमे की नमाज में लोगों से अपील की गई है कि वे कुर्बानी करते समय अपने घर में बड़ी- बड़ी पोलोथिन की काली थैलियां रखें और पशुओं की कुर्बानी से निकलने वाली गलाजत सड़कों पर फेकें की जगह निर्धारित स्थानों पर डालने का इंतजाम कराएं.

पशुओं के अवशेष खुले में डालने से कुत्ते और चील मंडराते रहते हैं. बाद वे दूसरों के घरों पर छोड़ जाते हैं. यह अदावत का घर है. ऐसा बिल्कुल न किया जाए.मौलाना अमिनी ने मुस्लिम समाज के युवाओं से भी अपील की है कि वे कुर्बानी के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर न डालें.

इससे दूसरों की भावनाएं आहत होती हैं. मनमुटाव पैदा होता है. उन्होंने छोटे मदरसों से अनुरोध किया कि वह जानवर की खाल की लालच में तब तक कुर्बानी का जिम्मा न लें, जब तक समुचित जगह का बंदोबस्त न किया जाए.

इसके अलावा उन्होंने बकरीद के मौके पर गैरकानूनी तरीके से पशुओं की कुर्बानी देने की भी मनाही की. उन्होंने कहा कि उनके मदरसे के पास पशुओं की खरीद से लेकर कुर्बानी तक का पूरा रिकॉर्ड होता है. ऐसी व्यवस्था सभी मदरसों में होनी चाहिए, ताकि भविष्य मंे किसी तरह के कानूनी पचड़े में पड़ने से बचा जा सके.

मौलाना मोहम्मद दाऊद अमिनी ने मुस्लिम समाज से गुजारिश की है कि,  कुर्बानी के दौरान या उसके बाद किसी दूसरे धर्म के लोगों को परेशानी होती है तो हमारी जिम्मेदारी है कि उस गलती को सुधारें.

सीलमपुर में मदरसों की पहल:

  • मदरसों ने नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से कुर्बानी और सफाई के विशेष इंतजाम किए.
  • समाज में अच्छा संदेश देने के लिए किए गए प्रबंधों की सराहना.

मदरसा सैयदना उमर फारूक:

  1. किराए पर जगह लेकर कुर्बानी की व्यवस्था की गई ताकि किसी को परेशानी न हो.
  2. कुर्बानी की जगह को चारों तरफ से बंद किया गया ताकि किसी को तकलीफ न हो.
  3. निजी सफाई कर्मचारियों से अवशेषों और गंदगी को उठवाकर नगर निगम के कूड़ेदान में डालने की व्यवस्था.

मदरसा बाबुल उलूम:

नालियों की सफाई और निकासी की व्यवस्था पहले से की गई.
मदरसे में बड़े हॉल में कुर्बानी की व्यवस्था.
किराए पर सफाई कर्मचारियों को रखकर कुर्बानी के बाद सफाई का प्रबंध.

सफाई और जन जागरूकता:

  • स्थानीय निकाय से सफाई गाड़ियों की संख्या बढ़ाने की अपील.
  • जुमे की नमाज में लोगों से अपील की गई कि वे कुर्बानी की गंदगी निर्धारित स्थानों पर ही डालें.
  • कुर्बानी के वीडियो सोशल मीडिया पर न डालने की सलाह.

कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी:

गैरकानूनी तरीके से पशुओं की कुर्बानी न देने की सलाह.
पशुओं की खरीद से लेकर कुर्बानी तक का पूरा रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था.
दूसरे धर्म के लोगों को परेशानी होने पर जिम्मेदारी से गलती सुधारने की अपील.