The aim was to prepare Mirabai Chanu for the Asian Games by saving her from injury: Coach Vijay Sharma
नई दिल्ली
भारतीय महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को चोट से बचाते हुए एशियाई खेलों के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिहाज से तैयार करना मुख्य कोच विजय शर्मा का प्राथमिक लक्ष्य था। कोच के मुताबिक, ट्रेनिंग के दौरान इसी रणनीति को अपनाने का फायदा मिला और चानू आखिरकार एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने में सफल रहीं।
मंगलवार सुबह भारत लौटीं मीराबाई चानू ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में महिलाओं की 49 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में रजत पदक जीता। इसके साथ ही उन्होंने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने का अपना संग्रह भी पूरा कर लिया।
चोट से बचाने पर रहा विशेष ध्यान
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में भारतीय राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग टीम के मुख्य कोच विजय शर्मा ने कहा कि इस बार मीराबाई के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम विशेष रूप से इस तरह तैयार किया गया था कि वह चोट से बची रहें और प्रतियोगिता के दौरान अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।
विजय शर्मा ने कहा, “हम इस पदक का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। मीराबाई की मेहनत की बदौलत आखिरकार यह सफलता मिली, जिससे मुझे और पूरे देश को बहुत खुशी हुई। उनकी मेहनत सफल रही।”
उन्होंने कहा, “हमारा एक ही लक्ष्य था। पिछली बार चोट के कारण हम एशियाई खेलों में पदक जीतने से चूक गए थे। पिछली प्रतियोगिता में भी चोट की वजह से हमें चौथे स्थान पर रहना पड़ा था।”
द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच ने आगे कहा, “मेरा लक्ष्य केवल ऐसा ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार करना था, जिससे मीराबाई चोट से बची रहें। हमने इसमें सफलता हासिल की। ट्रेनिंग के भार को इस तरह नियंत्रित किया गया कि चोट का जोखिम उठाए बिना वह अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के स्तर तक पहुंच सकें। इसका नतीजा पदक के रूप में सामने आया।”
198 किलोग्राम वजन उठाकर जीता रजत
32 वर्षीय मीराबाई चानू ने कुल 198 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। स्नैच वर्ग में उन्होंने अपने तीनों प्रयास सफलतापूर्वक पूरे किए। उन्होंने क्रमशः 83, 85 और 87 किलोग्राम वजन उठाया।
क्लीन एंड जर्क में चानू ने अपने पहले दो प्रयासों में 107 और 111 किलोग्राम वजन उठाया। उत्तर कोरिया की री सोंग गुम ने कुल 215 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि विजायना को कांस्य पदक मिला।
2023 में चोट के कारण पदक से चूक गई थीं
मीराबाई चानू के करियर में यह पदक खास महत्व रखता है। इससे पहले उनके नाम ओलंपिक रजत पदक, विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, तीन राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक और एशियाई चैंपियनशिप के पदक दर्ज थे। हालांकि, एशियाई खेलों का पदक उनके संग्रह में नहीं था।
वर्ष 2023 में हांगझोऊ एशियाई खेलों के दौरान चोट के कारण उन्हें क्लीन एंड जर्क का अंतिम प्रयास छोड़ना पड़ा था। इसके चलते वह चौथे स्थान पर रही थीं और पदक जीतने से चूक गई थीं। तीन साल बाद उन्होंने वापसी करते हुए रजत पदक जीत लिया।
राष्ट्रमंडल खेलों में भी जीता था स्वर्ण
मीराबाई चानू ने एशियाई खेलों में उतरने से पहले वर्ष 2026 के ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। यह राष्ट्रमंडल खेलों में उनका तीसरा स्वर्ण था। इससे पहले उन्होंने 2018 के गोल्ड कोस्ट और 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीते थे।
एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने के साथ ही चानू, कर्णम मल्लेश्वरी के बाद दूसरी भारतीय वेटलिफ्टर बन गईं, जिन्होंने ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व चैंपियनशिप, एशियाई चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में पदक जीतने की उपलब्धि हासिल की।