आईपीएल में राजनीति की एंट्री? मुस्तफिज़ुर प्रकरण ने खड़े किए सवाल

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 05-01-2026
Politics entering the IPL? The Mustafizur incident raises questions.
Politics entering the IPL? The Mustafizur incident raises questions.

 

आवाज द वाॅयस/नई दिल्ली 

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 से पहले बांग्लादेशी तेज़ गेंदबाज़ मुस्तफिज़ुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) द्वारा रिलीज़ किए जाने का मामला अब केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के निर्देश पर हुए इस फैसले ने खेल, राजनीति और कूटनीति—तीनों को एक साथ जोड़ दिया है। जहां एक ओर बीसीसीआई अपने निर्णय पर कायम है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाज़ी जारी है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब खुद मुस्तफिज़ुर रहमान, भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) की प्रतिक्रिया भी सामने आ चुकी है।

बीसीसीआई के निर्देश के बाद केकेआर ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि मुस्तफिज़ुर रहमान को टीम से रिलीज़ कर दिया गया है। फ्रेंचाइज़ी ने साफ किया कि यह फैसला बोर्ड के निर्देशों, आवश्यक प्रक्रियाओं और सलाह-मशविरे के बाद लिया गया। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया के अनुसार, फ्रेंचाइज़ी को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि बांग्लादेशी गेंदबाज़ को अपने स्क्वाड से अलग किया जाए।

गौरतलब है कि मुस्तफिज़ुर रहमान को दिसंबर 2025 में हुई आईपीएल 2026 की नीलामी में केकेआर ने 9.20 करोड़ रुपये की भारी रकम में खरीदा था। इसके साथ ही वह आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे बांग्लादेशी खिलाड़ी बन गए थे। लेकिन बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक घटनाओं और भारत में उठे विरोध के बीच उनका यह सफर अचानक थम गया।

इस पूरे विवाद के बीच भारत के पूर्व कप्तान और तेलंगाना सरकार में मंत्री मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने बीसीसीआई के फैसले का समर्थन किया। अज़हरुद्दीन ने कहा कि बोर्ड ने जिम्मेदारी के साथ फैसला लिया है और इसमें कोई गलती नहीं है।
उन्होंने कहा, “बोर्ड ने कुछ भी गलत नहीं किया। बांग्लादेश में हालात अच्छे नहीं हैं। खेल को अलग नजरिए से देखना चाहिए, लेकिन बीसीसीआई ने जो भी निर्णय लिया होगा, वह गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से विचार-विमर्श के बाद ही लिया गया होगा।”
उनके बयान से साफ संकेत मिला कि यह फैसला केवल खेल तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया।

हालांकि, इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कहीं अधिक आक्रामक रुख अपनाया। बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने न सिर्फ केकेआर के फैसले पर सवाल उठाए, बल्कि टीम के सह-मालिक अभिनेता शाहरुख़ ख़ान पर भी सीधा हमला बोला।
उन्होंने कहा, “जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं और उन्हें सुरक्षा नहीं मिल रही है, ऐसे समय में एक बांग्लादेशी खिलाड़ी को खरीदने का फैसला क्यों किया गया? क्या शाहरुख़ ख़ान को शर्म नहीं आनी चाहिए? उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।”

बीजेपी के इस बयान के बाद कांग्रेस ने तीखा पलटवार करते हुए इसे खेल को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश बताया।कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने शाहरुख़ ख़ान का बचाव करते हुए कहा, “इस पूरे मामले में शाहरुख़ ख़ान की कोई गलती नहीं है। सिर्फ इसलिए कि वे मुसलमान हैं, उनके खिलाफ जानबूझकर माहौल बनाया जा रहा है।

बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह गलत है, लेकिन भारत में मुसलमानों और ईसाइयों पर हो रही हिंसा पर क्यों चुप्पी साध ली जाती है?”उन्होंने यह भी कहा कि शाहरुख़ ख़ान के पूर्वजों ने आज़ादी की लड़ाई में अंग्रेज़ों के खिलाफ संघर्ष किया था, जबकि उनके आलोचकों के पूर्वज ब्रिटिश शासन के सहयोगी रहे।

बीजेपी नेता रविंदर रैना ने बीसीसीआई के फैसले को बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता से जोड़ते हुए कहा कि वहां हालात बेहद नाज़ुक हैं।उन्होंने कहा, “शेख हसीना सरकार के पतन और तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में गृहयुद्ध जैसे हालात हैं। भारत हमेशा खेल को खेल भावना से देखता है, लेकिन जब राष्ट्रीय पहचान और सुरक्षा का सवाल आता है, तो कुछ फैसले लेने पड़ते हैं। बीसीसीआई ने वही किया है, जिसकी देश अपेक्षा कर रहा था।”

वहीं, कांग्रेस के ओडिशा प्रभारी अजय कुमार लल्लू ने बीजेपी पर चयनात्मक राष्ट्रवाद का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “बीजेपी शासित राज्यों में भाषा और धर्म के नाम पर हिंसा हो रही है, लेकिन उस पर कोई सवाल नहीं उठाता। जब हाल ही में पूरा देश भारत-पाकिस्तान मैच के खिलाफ था, तब बीसीसीआई सचिव जय शाह ने कोई राष्ट्रवादी रुख क्यों नहीं अपनाया? अगर बांग्लादेशी खिलाड़ी के खेलने पर सवाल उठ रहे हैं, तो इसकी जिम्मेदारी जय शाह की क्यों नहीं तय की जा रही?”

इस बीच, खुद मुस्तफिज़ुर रहमान की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। बांग्लादेशी मीडिया से बातचीत में उन्होंने संयमित लहजे में कहा, “अगर आपको ड्रॉप कर दिया जाता है, तो आप और क्या कर सकते हैं?” उनका यह बयान खिलाड़ी की बेबसी और पेशेवर मजबूरी को दर्शाता है।

भारतीय क्रिकेट जगत से भी इस फैसले पर प्रतिक्रियाएं आई हैं। 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य और पूर्व ऑलराउंडर मदन लाल ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा, “बीसीसीआई का फैसला इतना मजबूत होता है कि उसे कोई चुनौती नहीं दे सकता, यहां तक कि शाहरुख़ ख़ान भी नहीं।”

उन्होंने सवाल उठाया कि खेल में इतनी राजनीति क्यों घुस आई है। “बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह दुखद है, लेकिन खिलाड़ियों को इसमें क्यों घसीटा जा रहा है? नीलामी तो समिति करती है, इसमें शाहरुख़ ख़ान की क्या गलती है?”
हालांकि, मदन लाल ने यह भी कहा कि देश की जनता की भावनाएं कई बार फैसलों पर भारी पड़ती हैं और इस दबाव में लिया गया फैसला पूरी तरह गलत भी नहीं कहा जा सकता।

इस पूरे विवाद का असर अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुँच गया है। अगले महीने शुरू होने वाले टी20 विश्व कप, जिसकी सह-मेजबानी भारत और श्रीलंका कर रहे हैं, से पहले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने बड़ा कदम उठाया है। बीसीबी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को एक औपचारिक पत्र भेजने का फैसला किया है, जिसमें खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए जाएंगे।

बांग्लादेश को ग्रुप चरण के अपने चार मैच भारत में खेलने हैं—तीन कोलकाता में और एक मुंबई में। लेकिन मुस्तफिज़ुर विवाद के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में बढ़े तनाव और सुरक्षा चिंताओं ने इन मैचों को लेकर भी अनिश्चितता पैदा कर दी है। बीसीबी की बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि आईसीसी की सुरक्षा इकाई को पत्र भेजकर स्थिति पर स्पष्टता मांगी जाए।

बीसीबी के एक वरिष्ठ निदेशक के अनुसार, “यह सिर्फ क्रिकेट का मामला नहीं है। यह खिलाड़ियों की सुरक्षा, मानसिक सुकून और टूर्नामेंट की निष्पक्षता से जुड़ा सवाल है।”सूत्रों के मुताबिक, पत्र में खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ, अधिकारियों, पत्रकारों और दर्शकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे।

कुल मिलाकर, मुस्तफिज़ुर रहमान का मामला अब एक खिलाड़ी की रिलीज़ से कहीं आगे निकल चुका है। यह विवाद खेल, राजनीति, जनभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के टकराव का प्रतीक बन गया है। अब सबकी निगाहें आईसीसी और बीसीसीआई पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या खेल को राजनीति से अलग रखने की कोशिश सफल हो पाती है या नहीं।