एशियन पैरा गेम्स में दो पदक जीतने वाले नितेश ने पिता को दिया श्रेय

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 31-10-2026
Nitesh, who won two medals at the Asian Para Games, credits his father
Nitesh, who won two medals at the Asian Para Games, credits his father

 

भिवानी।

एशियन पैरा गेम्स 2026 में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर लौटे भारतीय पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश कुमार ने अपनी कामयाबी का श्रेय पिता विजेंद्र सिंह को दिया है। उन्होंने कहा कि जीवन के सबसे कठिन दौर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने तक उनके पिता सबसे मजबूत सहारा बने रहे।

जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में नितेश ने पुरुष एकल एसएल3 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में उन्होंने भारत के अनुभवी खिलाड़ी प्रमोद भगत को हराया। इसके अलावा, उन्होंने तुलसीमति मुरुगेसन के साथ मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया।

नितेश की जिंदगी में खेल तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। वर्ष 2009 में एक रेल हादसे में उनका बायां पैर चला गया था। इसके बाद उन्हें शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।

एएनआई से बातचीत में नितेश ने कहा कि उनके पिता दुर्घटना के समय से ही उनके साथ खड़े रहे। जब वह बेहद निराश थे, तब भी पिता ने उन्हें हार नहीं मानने दी।

उन्होंने कहा, “मेरे पिता सिर्फ खेल के सफर में ही नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी में मेरे सबसे बड़े सहायक रहे हैं। 2009 में हुए हादसे से लेकर आज एशियन गेम्स में दो पदक जीतने तक वह मेरी सबसे मजबूत ताकत रहे। जब मैं बहुत निराश था, तब उन्होंने मुझे हार मानने नहीं दी। वह लगातार मेरा हौसला बढ़ाते रहे और चीजों को देखने का एक नया नजरिया दिया।”

पिता ने खेल को आगे बढ़ाने के लिए किया प्रोत्साहित

नितेश ने बताया कि जब उन्होंने बैडमिंटन खेलना शुरू किया, तो उनकी मां चाहती थीं कि वह पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दें। परिवार को लगता था कि पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के बाद वह एक स्थिर सरकारी नौकरी हासिल कर सकते हैं। ऐसे में खेल को करियर बनाने को लेकर शुरुआत में कुछ हिचकिचाहट थी।

लेकिन उनके पिता ने खेल के प्रति उनकी रुचि को समझा और उनका साथ दिया।

नितेश के मुताबिक, उनके पिता ने हमेशा उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। उनके इसी समर्थन ने खेल में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।

आईआईटी मंडी से पढ़ाई, फिर बैडमिंटन में करियर

31 वर्षीय नितेश कुमार ने आईआईटी मंडी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। संस्थान में पढ़ाई के दौरान उन्होंने शुरुआत में मनोरंजन और शौक के तौर पर बैडमिंटन खेलना शुरू किया था।

पहले उनका ध्यान पढ़ाई और एक स्थिर नौकरी हासिल करने पर था। लेकिन धीरे-धीरे पैरा बैडमिंटन के प्रति उनका आकर्षण बढ़ा। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इस खेल को पेशेवर करियर के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया।

नितेश फिलहाल पुरुष एकल एसएल3 वर्ग में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी हैं। एशियन पैरा गेम्स के फाइनल में प्रमोद भगत जैसे अनुभवी खिलाड़ी को हराना उनके लिए खास उपलब्धि रही।

उन्होंने कहा कि प्रमोद भगत इस स्पर्धा के सबसे मजबूत खिलाड़ियों में हैं। मानसिक मजबूती के मामले में भी वह उन्हें बेहद प्रभावशाली मानते हैं।

नितेश ने कहा, “प्रमोद भाई के खिलाफ फाइनल जीतना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। दो गेम में जीत हासिल करने से मेरे लिए इसकी अहमियत और बढ़ गई। एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर उनके खिलाफ दबाव के बीच संयम बनाए रखना और दो गेम में स्वर्ण जीतना मेरे लिए गर्व की बात है।”

विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतना अगला लक्ष्य

नितेश विश्व चैंपियनशिप में दो रजत और एक कांस्य पदक जीत चुके हैं। हालांकि, अब उनकी नजर इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल करने पर है।

उन्होंने कहा कि पदकों की सूची में विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण अब भी एक अधूरा लक्ष्य है। वह लंबे समय से इसे हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं।

पैरा खिलाड़ियों की बढ़ती कामयाबी पर क्या बोले नितेश?

भारत ने 2026 एशियन पैरा गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 114 पदक जीते और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। यह प्रतियोगिता के इतिहास में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। पिछले संस्करण में भारत की आधिकारिक पदक संख्या 108 थी।

इस बार भारतीय दल में केवल 168 खिलाड़ी शामिल थे और प्रतियोगिता के दिन भी कम थे। इसके बावजूद खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।

नितेश ने कहा कि भारतीय पैरा खिलाड़ियों की सफलता लगातार बढ़ रही है और इस प्रगति की कोई सीमा नहीं है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को जनता, मंत्रालय और विभिन्न संगठनों से मिल रहा सहयोग उन्हें मजबूत बना रहा है।

उनके मुताबिक, अब खिलाड़ियों को केवल सहानुभूति की नजर से नहीं देखा जाता, बल्कि उन्हें बेहतर अवसर और समर्थन देने की कोशिश की जा रही है। इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा है।

नितेश ने कहा कि भारत में अभी कई पैरा खेल ऐसे हैं, जिनमें देश की भागीदारी नहीं के बराबर है। इन खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और ज्यादा खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं से जोड़ने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि अगर भारत अधिक पैरा खेलों में हिस्सा लेगा और विभिन्न स्पर्धाओं में अपनी उपस्थिति मजबूत करेगा, तो भविष्य में पदकों की संख्या और बेहतर हो सकती है।

प्रधानमंत्री से मुलाकात को लेकर उत्साहित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़े खेल आयोजनों के बाद खिलाड़ियों और पदक विजेताओं से मुलाकात करते रहे हैं। आगामी मुलाकात को लेकर नितेश ने भी उत्साह जताया।

उन्होंने बताया कि 2018 एशियन गेम्स के बाद पहली बार उनकी प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई थी। इसके बाद 2023 एशियन गेम्स और पेरिस पैरालंपिक के बाद भी वह उनसे मिल चुके हैं।

नितेश ने कहा कि प्रधानमंत्री से मुलाकात हमेशा प्रेरणादायक और उत्साह बढ़ाने वाली रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जिस गर्मजोशी से खिलाड़ियों का स्वागत करते हैं और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं, उससे खिलाड़ियों को नई ऊर्जा मिलती है।

नितेश ने कहा कि वह अगले सप्ताह प्रधानमंत्री के आवास पर होने वाली मुलाकात का इंतजार कर रहे हैं। वहां कुछ अनौपचारिक बातचीत का भी अवसर मिलेगा।