Delhi has played a vital role in the success of Jammu and Kashmir.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
यह किस्सा 90 के दशक का है, जब रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट दौर से पहले तक मैच क्षेत्रीय प्रारूप में खेले जाते थे। तब प्रत्येक खिलाड़ी को पता होता था कि रन बनाने के लिए उसे किस को निशाने पर रखना है।
बंगाल के लिए पूर्व क्षेत्र में त्रिपुरा प्रमुख प्रतिद्वंदी हुआ करता था। दक्षिण में तमिलनाडु और कर्नाटक गोवा को आसानी से हरा देते थे। उत्तर में दिल्ली के दिग्गज खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करने के लिए जम्मू कश्मीर के खिलाफ होने वाले मैच पर नजर रखते थे।
भारत की तरफ से टेस्ट और वनडे खेलने वाले दिल्ली के एक पूर्व कप्तान ने यह मजेदार किस्सा सुनाया।
इस पूर्व कप्तान ने कहा, ‘‘यह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में मेरा पहला सत्र था और हमने जम्मू कश्मीर के खिलाफ बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। आमतौर पर दिन की शुरुआत में पांचवें नंबर तक के बल्लेबाज पैड पहनते हैं। मुझे याद है कि घरेलू क्रिकेट में ढेरों रन बनाने वाला पांचवें नंबर का हमारा बल्लेबाज पैड पहन रहा था। तभी हमारे तीसरे नंबर के बल्लेबाज ने एक ऐसा सवाल पूछा जिसे वह जरूरी समझते थे। इस बल्लेबाज ने कहा था ‘भाई तू पैड क्यों पहन रहा है।’’
पांचवें नंबर के बल्लेबाज ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर है तो क्या पैड भी न पहनूं।’’
तीसरे नंबर के बल्लेबाज ने पलटवार करते हुए कहा कि दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर होने के कारण शायद उनकी बारी भी न आए।
जम्मू कश्मीर की शनिवार को रणजी ट्रॉफी में पहली खिताबी जीत ने इस बात को साबित कर दिया कि तीन दशक पुराना यह किस्सा इसका संकेत बन गया है कि टीम ने तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए कितनी प्रगति की है।
दिल्ली के एक अन्य भारतीय खिलाड़ी ने उस समय को याद किया जब दिग्गज मोहिंदर अमरनाथ की उपस्थिति ही जम्मू कश्मीर के खिलाड़ियों को खौफ में डालने के लिए काफी होती थी।
इस खिलाड़ी ने कहा, ‘‘उनके लिए जिम्मी पा किसी दूसरे ग्रह से आए थे। उस पीढ़ी के जम्मू कश्मीर के खिलाड़ी उन्हें देखकर घबरा जाते थे। उन्हें विश्वास ही नहीं होता था कि जिम्मी पा उनकी गेंदबाजी का सामना कर रहे हैं।’’
घरेलू क्रिकेट में दिल्ली के दबदबे वाले दिन अब लद चुके हैं और जम्मू कश्मीर के कमजोर टीम होने के दिन भी खत्म होते दिख रहे हैं।
जम्मू कश्मीर के इस मुकाम पर तक पहुंचने में दिल्ली के खिलाड़ियों का योगदान अहम रहा है। पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी का कोच के रूप में जम्मू कश्मीर से जुड़ना पहला बदलाव था।
जम्मू कश्मीर के पहले भारतीय क्रिकेटर परवेज़ रसूल ने दिवंगत भारतीय कप्तान की सलाह को याद करते हुए कहा, ‘‘बेदी सर हमसे कहते थे, ‘बेटा तुम यहां सिर्फ गिनती पूरी करने के लिए नहीं हो। तुम यहां प्रतिस्पर्धा करने के लिए हो। संगठन की राजनीति में मत पड़ो और अपनी पूरी क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करो।’’