Anti-doping system in Afghanistan grinds to a halt; testing virtually suspended.
नयी दिल्ली
अफगानिस्तान में डोपिंग रोधी (एंटी-डोपिंग) व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और देश का खेल तंत्र लगभग ठहराव की स्थिति में पहुंच गया है। तालिबान शासन के दौरान खेल संरचनाओं पर पड़े असर का सीधा प्रभाव डोपिंग नियंत्रण प्रणाली पर भी दिखाई दे रहा है। हालात ऐसे हैं कि पिछले कई वर्षों में परीक्षण लगभग बंद हो गए हैं और इस पूरे ढांचे को चलाने के लिए आवश्यक मानव संसाधन भी लगभग समाप्त हो चुके हैं।
अफगानिस्तान की डोपिंग रोधी समिति के निर्वासित अध्यक्ष डॉ. अब्दुल रहमान हमीद ने बताया कि बीते तीन वर्षों में देश में एक भी डोपिंग परीक्षण नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि केवल पिछले वर्ष ईरान की सहायता से महज चार परीक्षण किए जा सके, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। उनके अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में किसी प्रभावी एंटी-डोपिंग कार्यक्रम की कल्पना करना भी मुश्किल है।
डॉ. हमीद ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि अफगानिस्तान में फिलहाल डोपिंग रोधी प्रणाली को लेकर “कोई उम्मीद नहीं बची है।” उन्होंने बताया कि देश में डोपिंग नियंत्रण अधिकारी (डीसीओ) भी मौजूद नहीं हैं, जो किसी भी एंटी-डोपिंग कार्यक्रम की रीढ़ माने जाते हैं। डीसीओ का काम प्रतियोगिताओं के दौरान और बाहर खिलाड़ियों के नमूने एकत्र करना तथा उन्हें सुरक्षित रूप से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं तक पहुंचाना होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले देश में दो डीसीओ कार्यरत थे, जो विश्वविद्यालयों में लेक्चरर के रूप में भी काम करते थे। लेकिन हालात बिगड़ने के बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा और अब अफगानिस्तान में कोई भी प्रशिक्षित अधिकारी उपलब्ध नहीं है जो यह जिम्मेदारी संभाल सके।
डॉ. हमीद के अनुसार, अफगानिस्तान में 2021 के बाद से लगभग सभी डोपिंग परीक्षण बंद हो गए थे। सीमित संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मदद से पिछले वर्ष कुछ परीक्षण संभव हो पाए, लेकिन यह प्रयास बहुत छोटा था और व्यापक व्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए पर्याप्त नहीं था।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान में एक स्वतंत्र और स्वायत्त डोपिंग रोधी एजेंसी की तत्काल आवश्यकता है। वर्तमान में यह समिति राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अधीन काम करती है, जिससे संसाधनों और कार्यक्षेत्र दोनों पर सीमाएं बनी रहती हैं। उनका कहना है कि जब तक एक स्वतंत्र संरचना और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक देश में डोपिंग नियंत्रण व्यवस्था का पुनर्निर्माण संभव नहीं है।