नई दिल्ली।
रमज़ान का महीना इबादत, सब्र और आत्मअनुशासन का समय होता है। इस दौरान मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं। इसलिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि रोज़ा सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से कैसे रखा जाए और किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना बेहतर रहता है। क्योंकि इस महीने में खाने और पीने का समय सीमित होता है। ऐसे में शरीर को जरूरी पोषक तत्व और तरल पदार्थ सही समय पर मिलना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस्लाम में सभी स्वस्थ वयस्क मुसलमानों के लिए रोज़ा रखना अनिवार्य माना गया है। हालांकि बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को रोज़े से छूट दी गई है। खासकर मधुमेह जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को रोज़ा रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
रोज़ा रखने के दौरान शरीर में पानी की कमी महसूस हो सकती है। कई लोगों को हल्का निर्जलीकरण, सिरदर्द, थकान या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो सकती है। हालांकि शोध बताते हैं कि यह स्थिति सामान्य है और आम तौर पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होती। लेकिन इफ्तार के बाद पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है ताकि दिन भर में शरीर से निकले तरल पदार्थ की कमी पूरी हो सके।
जो लोग नियमित रूप से चाय या कॉफी जैसे कैफीनयुक्त पेय पदार्थ पीते हैं, उन्हें रमज़ान के शुरुआती दिनों में सिरदर्द या थकान महसूस हो सकती है। यह कैफीन की कमी के कारण होता है। कुछ दिनों बाद शरीर धीरे धीरे इसके बिना रहने का आदी हो जाता है और यह समस्या कम हो जाती है।
रोज़ा खोलते समय भोजन धीरे धीरे करना बेहतर होता है। लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद अचानक भारी भोजन करने से शरीर पर असर पड़ सकता है। इफ्तार की शुरुआत पानी और हल्के तरल पदार्थों से करना अच्छा माना जाता है। सूप, दही, फल और सब्जियों जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को ऊर्जा देने के साथ पानी की कमी भी पूरी करते हैं।
रमज़ान में सहरी का भोजन भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। सहरी दिन भर के रोज़े के लिए शरीर को ऊर्जा और तरल प्रदान करती है। इसलिए सहरी में संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना चाहिए। नमक वाले भोजन से प्यास ज्यादा लगती है इसलिए बहुत अधिक नमकीन खाद्य पदार्थों से बचना बेहतर है।
इफ्तार में खजूर से रोज़ा खोलना एक पुरानी और स्वस्थ परंपरा है। पैगंबर हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के समय से ही खजूर से रोज़ा खोलने की परंपरा चली आ रही है। खजूर में प्राकृतिक शर्करा, पोटेशियम और कई जरूरी खनिज पाए जाते हैं जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं। इसके अलावा खुबानी, किशमिश, अंजीर और आलूबुखारा जैसे सूखे मेवे भी फायदेमंद होते हैं।
रमज़ान में अत्यधिक तले हुए, मीठे और भारी भोजन से बचना चाहिए। अधिक खाने से वजन बढ़ सकता है और पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। संतुलित आहार अपनाना इस महीने का एक सकारात्मक पहलू हो सकता है जो आगे भी स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने में मदद करता है।
कुछ लोगों को रमज़ान में कब्ज की समस्या भी हो सकती है। इससे बचने के लिए साबुत अनाज, दालें, फल, सब्जियां और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। साथ ही पर्याप्त पानी पीना और इफ्तार के बाद हल्की सैर करना भी लाभदायक रहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रमज़ान केवल आध्यात्मिक साधना का समय नहीं है बल्कि यह शरीर और खानपान की आदतों को संतुलित करने का भी अवसर देता है। सही आहार, पर्याप्त पानी और संतुलित दिनचर्या के साथ रोज़ा रखने से व्यक्ति इस पवित्र महीने का पूरा लाभ उठा सकता है।





