नई दिल्ली
सुबह की शुरुआत ताजे फलों के रस के साथ करना कई लोगों की आदत होती है। इसे सेहतमंद विकल्प माना जाता है, लेकिन क्या यह वास्तव में उतना ही फायदेमंद है जितना हम सोचते हैं? हाल के विशेषज्ञों और शोधों के अनुसार, फलों का रस पीने से रक्त शर्करा यानी ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है—और यह केवल मधुमेह के मरीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ लोगों में भी देखा गया है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि फलों के रस में प्राकृतिक रूप से मौजूद शर्करा—फ्रक्टोज और ग्लूकोज—बहुत तेजी से शरीर में अवशोषित हो जाती है। जब हम साबुत फल खाते हैं, तो उसमें मौजूद फाइबर शर्करा के अवशोषण को धीमा कर देता है। लेकिन जब फल का रस निकाला जाता है, तो अधिकतर फाइबर हट जाता है। यही कारण है कि जूस पीने पर शर्करा सीधे रक्त में तेजी से पहुंचती है और ब्लड शुगर में अचानक वृद्धि होती है, जिसे ‘शुगर स्पाइक’ कहा जाता है।
यह समझना जरूरी है कि स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में इंसुलिन हार्मोन इस बढ़े हुए शुगर लेवल को नियंत्रित करने का काम करता है। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से अधिक मात्रा में जूस का सेवन करता है, तो बार-बार होने वाले ये शुगर स्पाइक्स शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। इससे लंबे समय में मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ सकता है।
इस विषय पर American Heart Association से जुड़े शोधों में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। मैसाचुसेट्स में बच्चों और किशोरों पर किए गए एक दीर्घकालिक अध्ययन के शुरुआती परिणामों में पाया गया कि नियमित रूप से मीठे पेय पदार्थों और फलों के रस (विशेषकर प्रतिदिन 8 औंस या उससे अधिक) का सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज के खतरे में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, यह प्रभाव मुख्य रूप से लड़कों में देखा गया, जबकि लड़कियों में यह स्पष्ट रूप से नहीं पाया गया।
अब सवाल उठता है कि क्या पैकेटबंद फलों का रस बेहतर विकल्प हो सकता है? विशेषज्ञ इस पर स्पष्ट रूप से चेतावनी देते हैं कि बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद जूस में अतिरिक्त चीनी, फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव मिलाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। यहां तक कि ताजे फलों का रस भी अगर ज्यादा मात्रा में लिया जाए, तो यह अतिरिक्त कैलोरी का कारण बन सकता है और वजन बढ़ा सकता है।
इसके विपरीत, साबुत फल खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इसमें न केवल फाइबर होता है, बल्कि विटामिन और खनिज भी भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर को संतुलित तरीके से पोषण देते हैं। फाइबर खासतौर पर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आप जूस पीना चाहते हैं, तो सीमित मात्रा में ही पिएं। खाली पेट जूस पीने से बचें और बिना चीनी मिलाए घर का बना ताजा रस ही चुनें। सबसे अच्छा विकल्प यह है कि आप अपने आहार में साबुत फलों को शामिल करें, ताकि शरीर को संतुलित पोषण मिल सके और ब्लड शुगर लेवल भी नियंत्रित रहे।