घर पर ग्लूकोमीटर से शुगर जांचते हैं? जानिए खाली पेट और खाने के बाद कितना होना चाहिए सामान्य स्तर

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 07-11-2026
Do you check your blood sugar at home using a glucometer? Find out what the normal levels should be—both on an empty stomach and after a meal.
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नई दिल्ली:

आज के समय में डायबिटीज और प्री-डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में बहुत से लोग घर पर ग्लूकोमीटर की मदद से नियमित रूप से अपना ब्लड शुगर लेवल जांचते हैं। लेकिन अक्सर लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि खाली पेट, भोजन के बाद और दिन के अलग-अलग समय में रक्त शर्करा का सामान्य स्तर कितना होना चाहिए।

दरअसल, शरीर में ब्लड शुगर का स्तर पूरे दिन एक जैसा नहीं रहता। खानपान, शारीरिक गतिविधि, नींद, तनाव और जीवनशैली जैसे कई कारणों से इसमें उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसलिए केवल एक बार शुगर जांचने से शरीर में ग्लूकोज के स्तर की पूरी जानकारी नहीं मिलती।

कोलकाता के मधुमेह एवं मेटाबॉलिज्म विशेषज्ञ डॉ. आशीष मित्रा के अनुसार, ब्लड शुगर की निगरानी के लिए दो प्रमुख जांच महत्वपूर्ण हैं। पहली फास्टिंग ब्लड शुगर और दूसरी भोजन के बाद की शुगर जांच।

1. खाली पेट शुगर का सामान्य स्तर कितना होना चाहिए?

फास्टिंग ब्लड शुगर जांच के लिए कम से कम आठ घंटे तक कुछ खाना नहीं चाहिए। इस जांच से पता चलता है कि भोजन के बिना शरीर रक्त में ग्लूकोज के स्तर को किस तरह नियंत्रित करता है।

दिए गए चिकित्सकीय मानकों के अनुसार:

  • 110 mg/dL से कम: सामान्य

  • 110 से 125 mg/dL: प्री-डायबिटीज

  • 126 mg/dL या उससे अधिक: डायबिटीज की आशंका

हालांकि, डायबिटीज की पुष्टि के लिए चिकित्सकीय जांच और जरूरत पड़ने पर दोबारा परीक्षण जरूरी होता है।

2. भोजन के दो घंटे बाद कितना होना चाहिए शुगर लेवल?

भोजन के दो घंटे बाद की जाने वाली जांच को पोस्टप्रांडियल ब्लड शुगर टेस्ट कहा जाता है। इससे पता चलता है कि भोजन से मिलने वाले ग्लूकोज को शरीर कितनी अच्छी तरह नियंत्रित कर रहा है।

इसके सामान्य मानक इस प्रकार बताए गए हैं:

  • 140 mg/dL से कम: सामान्य

  • 140 से 199 mg/dL: प्री-डायबिटीज की आशंका

  • 200 mg/dL या उससे अधिक: डायबिटीज की आशंका

ध्यान रहे कि ये मानक मुख्य रूप से प्रयोगशाला में किए जाने वाले परीक्षणों के आधार पर हैं। घर पर ग्लूकोमीटर से प्राप्त रीडिंग को सीधे डायबिटीज का निदान नहीं माना जाना चाहिए।

3. HbA1c जांच से पता चलता है तीन महीने का औसत शुगर लेवल

डायबिटीज की निगरानी के लिए HbA1c जांच भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह पिछले लगभग दो से तीन महीनों के औसत रक्त शर्करा स्तर की जानकारी देती है।

इसके सामान्य मानक हैं:

  • 5.7 प्रतिशत से कम: सामान्य

  • 5.7 से 6.4 प्रतिशत: प्री-डायबिटीज

  • 6.5 प्रतिशत या उससे अधिक: डायबिटीज की आशंका

इस जांच से यह समझने में मदद मिलती है कि लंबे समय तक शरीर में शुगर का स्तर कितना नियंत्रित रहा है।

शुगर का स्तर किस सीमा में रखने की कोशिश करें?

डॉ. आशीष मित्रा के अनुसार, खाली पेट शुगर को 90 से 110 mg/dL और भोजन के बाद 140 से 160 mg/dL के बीच रखने का प्रयास करना चाहिए।

हालांकि, हर मरीज के लिए शुगर का लक्ष्य उसकी उम्र, स्वास्थ्य और इलाज की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।

सिर्फ एक बार शुगर जांचना पर्याप्त नहीं

विशेषज्ञ के अनुसार, घर पर ग्लूकोमीटर से शुगर जांचने वाले लोगों को केवल एक समय की रीडिंग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। अलग-अलग समय पर शुगर की जांच करने से शरीर में होने वाले उतार-चढ़ाव का बेहतर अंदाजा मिलता है।

कई बार ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति की खाली पेट और दोपहर के भोजन के बाद शुगर सामान्य रहती है, लेकिन उसका HbA1c 6.5 प्रतिशत से अधिक आता है। इसकी वजह यह हो सकती है कि नाश्ते या रात के खाने के बाद उसका शुगर लेवल बढ़ जाता हो और उस समय जांच नहीं की जाती हो।

इसी तरह, कभी-कभी शुगर का स्तर कम होने से भूख लग सकती है। व्यक्ति भोजन कर लेता है और उसके बाद शुगर बढ़ जाती है। ऐसे उतार-चढ़ाव को समझने के लिए अलग-अलग भोजन के बाद शुगर की जांच उपयोगी हो सकती है। हालांकि, जांच की आवृत्ति डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।

शुगर कम होने पर भी रहें सतर्क

विशेषज्ञ ने हाइपोग्लाइसीमिया यानी रक्त में शुगर का सामान्य से कम हो जाना भी गंभीरता से लेने की सलाह दी है।

यदि ब्लड शुगर 70 mg/dL से नीचे चला जाता है, तो इसे हाइपोग्लाइसीमिया माना जाता है। ऐसी स्थिति में पसीना आना, कंपकंपी, तेज भूख लगना, चक्कर आना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

इसलिए शुगर को बहुत कम होने से बचाना जरूरी है। खासकर डायबिटीज की दवा या इंसुलिन लेने वाले लोगों को नियमित निगरानी रखनी चाहिए।

निष्कर्ष: डायबिटीज से बचाव और नियंत्रण के लिए केवल एक बार की शुगर रिपोर्ट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। फास्टिंग शुगर, भोजन के बाद की रीडिंग और HbA1c तीनों को ध्यान में रखना चाहिए। नियमित जांच, संतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह से ही ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखा जा सकता है।