नई दिल्ली।
सर्दियों का मौसम आते ही हमारी दिनचर्या बदल जाती है—कपड़ों से लेकर खाने-पीने तक। चाय, कॉफी, सूप और गर्म पानी की ओर झुकाव बढ़ जाता है, जबकि ठंडे पेय अपने-आप पीछे छूट जाते हैं। इसके बावजूद, कुछ लोग ऐसे होते हैं जो सर्दियों में भी ठंडा पानी पीना नहीं छोड़ते—कभी आदत के कारण, तो कभी स्वाद की पसंद की वजह से। यहीं से सवाल उठता है: क्या सर्दियों में ठंडा पानी पीना सुरक्षित है, या यह सेहत के लिए जोखिम बन सकता है?
यह लेख इसी सवाल का संतुलित, वैज्ञानिक और व्यवहारिक जवाब देने की कोशिश करता है—ताकि आप अपनी सेहत का सही “गेम प्लान” बना सकें।
सर्दियों में पानी की कमी: दिखती नहीं, पर होती ज़रूर है
अक्सर माना जाता है कि पसीना कम आता है, इसलिए पानी की ज़रूरत भी कम होती है। यही सबसे बड़ी भूल है। सर्दियों में प्यास का एहसास कम होता है, लेकिन शरीर को पानी की ज़रूरत उतनी ही रहती है। शुष्क हवा, हीटर या गर्म कमरे, कम तरल पदार्थ—ये सभी मिलकर निर्जलीकरण का कारण बन सकते हैं।
पानी पाचन को सुचारू रखता है, रक्त परिसंचरण में मदद करता है, जोड़ों की चिकनाई बनाए रखता है, त्वचा को नमी देता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। मौसम कोई भी हो, हाइड्रेशन से समझौता नहीं होना चाहिए।
तो क्या ठंडा पानी वाकई नुकसानदेह है?
साफ़ जवाब—अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए नहीं। यदि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो सर्दियों में कभी-कभार ठंडा या सामान्य ठंडक वाला पानी पीने से गंभीर समस्या नहीं होती। हमारा शरीर अपने आंतरिक तापमान को संतुलित करने में सक्षम होता है और ज़रूरत पड़ने पर खुद को ढाल लेता है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ठंडा पानी कुछ लोगों में अस्थायी असहजता पैदा कर सकता है—जैसे गले में खराश, खांसी, सीने में जकड़न या साइनस की परेशानी। जिनका गला संवेदनशील होता है या जिन्हें जल्दी सर्दी लग जाती है, उनके लिए यह असहजता ज़्यादा हो सकती है।
पाचन पर असर: अंदरूनी खेल
ठंडा पानी पीने पर शरीर को उसे पहले गर्म करना पड़ता है, ताकि पाचन प्रक्रिया सुचारू हो सके। इस अतिरिक्त मेहनत के कारण कुछ लोगों में पाचन धीमा पड़ सकता है। नतीजा—पेट फूलना, गैस, अपच या बेचैनी।
सर्दियों में शरीर पहले ही खुद को गर्म रखने के लिए अधिक ऊर्जा खर्च करता है। ऐसे में बार-बार बहुत ठंडा पानी पीना शरीर के तापमान को गिरा सकता है, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है—खासकर बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में।
जोड़ों और सांस की सेहत: ठंड का सीधा वार
ठंडा पानी कुछ मामलों में जोड़ों की अकड़न या दर्द को बढ़ा सकता है, विशेषकर उन लोगों में जिन्हें गठिया या जोड़ों की पुरानी समस्या है। इसी तरह, अस्थमा या अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं वाले लोगों में ठंडा पानी सांस लेने में तकलीफ को बढ़ा सकता है।
यानी, यह सिर्फ स्वाद का मामला नहीं—यह व्यक्तिगत सेहत प्रोफाइल का सवाल भी है।
किसे ज़्यादा सावधान रहना चाहिए?
हालांकि हर किसी को ठंडा पानी छोड़ने की ज़रूरत नहीं, लेकिन कुछ समूहों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए:
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बुजुर्ग
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जिन्हें बार-बार सर्दी, खांसी या साइनस की समस्या रहती है
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गठिया या जोड़ों के दर्द से जूझ रहे लोग
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अस्थमा या अन्य श्वसन रोगी
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जिनकी पाचन क्रिया संवेदनशील है
इन लोगों के लिए कमरे के तापमान पर या गुनगुना पानी बेहतर विकल्प हो सकता है। यह न सिर्फ पचाने में आसान होता है, बल्कि शरीर को अंदर से आराम भी देता है।
गुनगुना पानी: सर्दियों का ‘सेफ प्ले’
यदि आप सर्दियों में एक सुरक्षित और लाभकारी आदत अपनाना चाहते हैं, तो गुनगुना पानी बेहतरीन विकल्प है। यह पाचन को सक्रिय करता है, गले को आराम देता है, रक्त संचार में सुधार करता है और शरीर को बिना झटके के हाइड्रेट रखता है।
सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना सर्दियों में खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है—यह मेटाबॉलिज्म को जगाता है और दिन की अच्छी शुरुआत कराता है।
सेहत का स्कोरकार्ड आपके हाथ में
सर्दियों में ठंडा पानी पीना अपने-आप में न तो पूरी तरह गलत है, न ही हर किसी के लिए सही। यह आपकी सेहत, आदत और शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। यदि ठंडा पानी पीने से आपको कोई परेशानी नहीं होती, तो कभी-कभार इसका सेवन नुकसानदेह नहीं। लेकिन अगर गला, पेट या जोड़ों से जुड़ी दिक्कतें बढ़ती हैं, तो समझदारी इसी में है कि आप गुनगुने या सामान्य तापमान वाले पानी को चुनें।
आखिरकार, सेहत कोई वन-डे मैच नहीं—यह लंबा खेल है। सही फैसला वही है, जो आपके शरीर को लंबे समय तक फिट और संतुलित रखे।






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