कोलकाता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान आ रही कठिनाइयों को गंभीर रूप से उठाया। उन्होंने दावा किया कि 2002 की मतदाता सूची को एआई आधारित तकनीक से डिजिटाइज करने में हुई त्रुटियों के कारण भारी संख्या में पात्र मतदाता प्रभावित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह पत्र एसआईआर की शुरुआत के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे अपने पाँचवे पत्र के रूप में भेजा। इसमें उन्होंने बताया कि 2002 की मतदाता सूची को डिजिटाइज करते समय एआई उपकरणों के प्रयोग से डेटा में बड़े पैमाने पर विसंगतियाँ आई हैं। कई मतदाताओं को “तार्किक विसंगतियों” वाला बताकर गलत तरीके से चिह्नित किया गया, जिससे उन्हें मतदान प्रक्रिया में भाग लेने में मुश्किलें आ रही हैं।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग पिछले दो दशकों से अपनाई जा रही अपनी ही वैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि अर्ध-न्यायिक सुनवाई और पहले किए गए संशोधनों के बावजूद मतदाताओं को अपनी पहचान साबित करने के लिए दोबारा बाध्य किया जा रहा है। उनका कहना था कि यह रवैया मनमाना, अतार्किक और संविधान की भावना के प्रतिकूल है।
मुख्यमंत्री ने एसआईआर प्रक्रिया को विसंगतियों से भरी और यांत्रिक बताते हुए आरोप लगाया कि इसमें जमा किए गए दस्तावेज़ों की कोई उचित पावती नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि पूरी सुनवाई प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी आंकड़ों पर आधारित हो गई है और इसमें विवेक, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का अभाव है।
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि इस तकनीकी और अर्ध-यांत्रिक प्रक्रिया के कारण लोकतंत्र और संवैधानिक ढांचे की बुनियाद कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना राज्य और केंद्र दोनों की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से आग्रह किया कि एसआईआर प्रक्रिया में आई त्रुटियों को तुरंत सुधारा जाए, ताकि सभी पात्र मतदाता बिना किसी बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग को तकनीकी उपकरणों का उपयोग करते समय मानवीय दृष्टिकोण और संवेदनशीलता बनाए रखना चाहिए, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।
इस पत्र में ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक और तकनीकी दृष्टि से संवेदनशील मुद्दा बताया और निर्वाचन आयोग से त्वरित सुधार की मांग की।