धरोहर की रक्षा में धर्म की दीवारें ढहाईं, रोहतास में मस्जिद का पुनर्निर्माण

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 12-01-2026
Breaking down religious barriers in the preservation of heritage, a mosque is being rebuilt in Rohtas.
Breaking down religious barriers in the preservation of heritage, a mosque is being rebuilt in Rohtas.

 

नौशाद अख्तर/ रोहतास (बिहार) 

बिहार के रोहतास जिले में एक ऐसी खबर सामने आई है, जो समाज में गहरी उम्मीद की किरण जगाती है। जहां एक ओर देशभर में सांप्रदायिक नफरत के बीज बोने की कोशिशें की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर रोहतास की पहाड़ियों में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिली है। यह खबर है 500 साल पुरानी मुग़लकालीन जामा मस्जिद के जीर्णोद्धार की, जिसमें हिंदू समुदाय ने बड़ी शिद्दत से भाग लिया है। रोहतास के इतिहास में यह घटना न केवल सांप्रदायिक एकता का प्रतीक बन रही है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी उजागर करती है।

रोहतास के चौरसन शिव मंदिर कमेटी के अध्यक्ष कृष्ण सिंह यादव और उनके सहयोगी इस ऐतिहासिक मस्जिद के जीर्णोद्धार के अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। इस अभियान में मुसलमानों का भी योगदान है, लेकिन हिंदू समुदाय का योगदान अधिक देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यह मस्जिद बिहार के रोहतासगढ़ किले के पास स्थित है, और इसे मुग़ल सम्राट अकबर के समय 1578 ईस्वी में हंस खान द्वारा निर्मित माना जाता है।
ddमस्जिद के जीर्णोद्धार की शुरुआत: हिंदूमुस्लिम 

यह अभियान रोहतास के एक गांव चौरसन के शिव मंदिर से शुरू हुआ था, जहां पहले शिव मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था। इस प्राचीन मस्जिद के जीर्णोद्धार का विचार कृष्ण सिंह यादव और उनके साथी, जिन्होंने चौरसन शिव मंदिर के लिए भी काम किया था, के मन में आया। इस प्रक्रिया के दौरान मस्जिद की सफाई और बाहरी क्षेत्रों से अवांछित व्यक्तियों को बाहर रखने की व्यवस्था की गई। इसके बाद मस्जिद के पुनर्निर्माण के कार्य की शुरुआत की गई, जिसमें आसपास के स्थानीय लोग, विशेष रूप से हिंदू समुदाय, बड़ी संख्या में सक्रिय रूप से जुड़े।
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कृष्ण सिंह यादव ने इस मस्जिद के जीर्णोद्धार को एक सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक माना और कहा, "यह हम सब की साझी धरोहर है, चाहे हम किसी भी धर्म के हों। हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।" उनके साथ इस काम में मुसलमान भी सक्रिय हैं, लेकिन हिंदू समुदाय का योगदान ज्यादा देखा जा रहा है। यह अभियान इस बात को साबित करता है कि धर्म से ऊपर उठकर समाज अपने सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने के लिए एकजुट हो सकता है।
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मस्जिद का ऐतिहासिक महत्व

यह मस्जिद, जो कि 500 साल पुरानी है, मुग़ल सम्राट अकबर के शासनकाल में बनी थी। इसे हंस खान ने बनवाया था, जो अकबर के विश्वासपात्रों में से थे। यह मस्जिद रोहतासगढ़ किले के गाजी दरवाजा परिसर में स्थित है और समय के साथ खंडहर में तब्दील हो गई थी। पहले इसे मवेशियों के रखने का स्थान बना लिया गया था और इसकी देखभाल का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया था।
 
हालांकि, इस ऐतिहासिक मस्जिद के जीर्णोद्धार के प्रयासों के बाद अब इसे फिर से पुनर्जीवित किया जा रहा है। इस पहल में स्थानीय लोग, खासकर हिंदू समुदाय के लोग, न केवल मस्जिद की सफाई कर रहे हैं, बल्कि इसके विकास और संरक्षण के लिए भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इस मस्जिद के जीर्णोद्धार के बाद यह ऐतिहासिक स्थल फिर से समाज के लिए एक गहना बनेगा।
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रोहतासगढ़ किला और कैमूर की पहाड़ियाँ: सांस्कृतिक धरोहर का समृद्ध इतिहास

रोहतास का इतिहास सिर्फ मस्जिद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी बेहद समृद्ध है। रोहतासगढ़ किला और इसके आसपास की कैमूर पहाड़ियाँ प्राचीन सभ्यताओं का गवाह रही हैं। इन पहाड़ियों में प्राचीन चित्रकला और शिलालेख पाए गए हैं, जो यहां के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।
 
कैमूर पहाड़ियाँ प्राचीन काल से मानव गतिविधियों का केंद्र रही हैं और यहां 10,000 ईसा पूर्व के प्रागैतिहासिक चट्टानी आश्रय स्थल भी मिलते हैं। इसके अलावा, यहां विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक अवशेष भी हैं, जो क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को और समृद्ध बनाते हैं। इन पहाड़ियों का सामरिक महत्व भी रहा है, जहां सम्राट शेर शाह सूरी का रास्ता गुजरता था और यह क्षेत्र उनके शासन का हिस्सा था।
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सांप्रदायिक सद्भाव की एक नई मिसाल

ffयह घटना बिहार के रोहतास में हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सद्भाव का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह भी दर्शाता है कि जब लोग धर्म से ऊपर उठकर अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की जिम्मेदारी लेते हैं, तो समाज में एकता और भाईचारे की मिसाल पेश होती है।
कृष्ण सिंह यादव और उनके साथियों के प्रयासों को देखकर यह कहा जा सकता है कि सांप्रदायिक सौहार्द का वास्तविक अर्थ यही है कि हम सब अपनी साझा विरासत को बचाने के लिए मिलकर काम करें।
 
कृष्ण सिंह यादव ने इस अभियान के विस्तार को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें साझा की।
 
उन्होंने कहा, "हमारा अगला कदम यह होगा कि हम रोहतास के अन्य प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की दिशा में भी काम करेंगे।
हम स्थानीय लोगों से अपील करते हैं कि वे अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने के लिए सक्रिय रूप से योगदान दें।"
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समाज में सकारात्मक बदलाव की ओर एक कदम

रोहतास में हो रहे इस अद्भुत कार्य से न केवल स्थानीय समुदाय का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि यह पूरी दुनिया को यह संदेश देता है कि सांप्रदायिक सद्भाव, भाईचारा और साझा संस्कृति की ताकत से हम अपनी धरोहरों को बचा सकते हैं।
 
इस उदाहरण से यह भी साबित होता है कि धर्म को लेकर असहमति होने के बावजूद, जब लोग एकजुट होते हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।
 
रोहतास के इस अभियान को लेकर अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत होगी और देशभर में ऐसे प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा।