आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कोल इंडिया लिमिटेड की दूसरी सबसे बड़ी कोयला उत्पादक इकाई साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हरीश दुहान ने सोमवार को कहा कि कंपनी बदलती वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों के बीच देश की कोयला मांग, विशेषकर बिजली क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे वैश्विक ऊर्जा मार्ग प्रभावित हुए हैं जिससे आयातित कोयला एवं द्रवीकृत प्राकृतिक गैस की लागत बढ़ गई है। इसका अप्रत्यक्ष दबाव भारत के कोयला और बिजली क्षेत्रों पर पड़ रहा है।
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक दुहान ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा कि कंपनी मजबूत परिचालन गति बनाए हुए है।
चालू वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने मार्च के मध्य तक करीब 16.5 करोड़ टन कोयले का उत्पादन और 16.9 करोड़ टन से अधिक कोयले का प्रेषण किया है जिससे बिजलीघरों तथा अन्य उपभोक्ताओं को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।
कंपनी एनटीपीसी, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरवीयूएनएल) और मध्य प्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (एमपीपीजीसीएल) जैसे प्रमुख बिजली उत्पादकों को कोयला आपूर्ति करती है।
दुहान ने बताया कि कंपनी के पास फिलहाल करीब 2.3 करोड़ टन कोयले का भंडार है जो बिजली क्षेत्र से मांग बढ़ने की स्थिति में पर्याप्त सहारा प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त कंपनी के पास लगभग 1.2 करोड़ टन कोयला भंडार ऐसा है जिसे तुरंत उत्पादन में बदला जा सकता है जिससे परिचालन में मजबूती बनी रहती है।