Warning from the sky, answer from the ground: The complete story of America's security network
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण खाड़ी के अरब देशों के महत्वपूर्ण ढांचे पर असर पड़ रहा है और वैश्विक तेल की कीमतें लगातार तेजी से बढ़ रही हैं। पश्चिम एशिया में अरबों डॉलर की अमेरिकी रडार प्रणाली भी ईरान के हमलों का निशाना बनी हैं और नष्ट हुई हैं, जिससे अमेरिका की रक्षा क्षमता पर असर पड़ा है।
ईरान के आसपास अमेरिका की सैन्य मौजूदगी में दर्जनों ठिकाने और हजारों सैनिक शामिल हैं, जो खतरे में हो सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर ईरान से कोई मिसाइल अमेरिकी सैन्य अड्डे की ओर दागी जाती है, तो सैनिकों को समय रहते इसकी जानकारी कैसे मिलती है?
अमेरिका और उसके सहयोगियों ने एक बहुस्तरीय प्रणाली विकसित की है, जो दिन-रात आसमान पर नजर रखती है। इस प्रणाली में अंतरिक्ष में उपग्रह, जमीन पर रडार, समुद्र में तैनात युद्धपोत और हवा में उड़ान भरने वाले विमान शामिल हैं।
इसके साथ ही अमेरिकी अंतरिक्ष कमान के प्रशिक्षित सैन्य अधिकारी इनसे मिले डेटा के आधार पर तुरंत फैसले लेते हैं। अमेरिकी वायु सेना के पूर्व अधिकारी और अब मिसिसिपी विश्वविद्यालय में एयरोस्पेस और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रोफेसर के रूप में मैंने उन विशाल गठबंधनों और प्रणालियों के नेटवर्क का अध्ययन किया है जो इसे संभव बनाते हैं।
मिसाइल का पता लगाने का सबसे तेज तरीका अंतरिक्ष से निगरानी है। अमेरिका के उन्नत उपग्रह, जैसे अंतरिक्ष आधारित इंफ्रारेड प्रणाली, पृथ्वी के ऊपर से लगातार निगरानी करते हैं। मिसाइल रक्षा के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले ये अरबों डॉलर के उपग्रह, मिसाइल प्रक्षेपण से निकलने वाली तीव्र गर्मी को लगभग तुरंत ही पहचान सकते हैं।