नई दिल्ली
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 19 अप्रैल से श्रीलंका की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। यह उपराष्ट्रपति की इस द्वीपीय देश की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सी.पी. राधाकृष्णन 19 अप्रैल से 20 अप्रैल तक इस द्वीपीय देश की यात्रा पर रहेंगे। इस यात्रा के दौरान, उपराष्ट्रपति श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री हरिणी अमरासुरिया के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों और भारतीय प्रवासियों के प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा करेंगे।
बयान में कहा गया है, "अपनी यात्रा के दौरान, माननीय उपराष्ट्रपति श्रीलंका के राष्ट्रपति, महामहिम अनुरा कुमार दिसानायके से मुलाकात करेंगे। वह श्रीलंका की माननीय प्रधानमंत्री डॉ. हरिणी अमरासुरिया, साथ ही अन्य गणमान्य व्यक्तियों और भारतीय प्रवासी नेताओं से भी मिलेंगे।" विदेश मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि श्रीलंका भारत के 'विजन महासागर' (Vision MAHASAGAR) और 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) नीति में एक प्रमुख भागीदार बना हुआ है। मंत्रालय ने आगे कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच हाल ही में हुई उच्च-स्तरीय वार्ताओं की निरंतरता में है और इससे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को और मज़बूती मिलने की उम्मीद है।
बयान में कहा गया है, "माननीय उपराष्ट्रपति की श्रीलंका यात्रा दोनों देशों के बीच हाल ही में हुई उच्च-स्तरीय वार्ताओं के बाद हो रही है, और यह भारत और श्रीलंका को आपस में जोड़ने वाले हज़ारों साल पुराने 'लोगों से लोगों के बीच' (people-to-people) संबंधों को और सुदृढ़ करेगी।" भारत और श्रीलंका के बीच 2,500 वर्षों से भी अधिक पुराना सभ्यतागत संबंध है, जिसकी नींव गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और 'लोगों से लोगों के बीच' के संपर्कों पर टिकी है।
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में, दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध एक परिपक्व और बहुआयामी साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं। इस साझेदारी में व्यापार, रक्षा सहयोग, विकास सहायता, कनेक्टिविटी, शिक्षा, संस्कृति और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों के लोगों के बीच व्यापक मेल-जोल से ये संबंध और भी मज़बूत होते हैं, जो एक बहुआयामी और सुदृढ़ साझेदारी की नींव के रूप में लगातार काम करते आ रहे हैं।
हाल ही में हुई वार्ताओं के दौरान, भारत ने अपने पड़ोसी देशों की विकास और ऊर्जा संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने में सहायता देने की अपनी प्रतिबद्धता को भी एक बार फिर दोहराया है। पिछले हफ़्ते पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर हुई एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफ़िंग के दौरान, MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत, श्रीलंका समेत अपने सहयोगी देशों को लगातार मदद पहुँचा रहा है।
उन्होंने कहा, "एक तरफ़ जहाँ हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने पर काम कर रहे हैं, वहीं हम अपने पड़ोसी देशों को भी, उनके अनुरोध पर, उनकी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में मदद दे रहे हैं। हमने दो हफ़्ते पहले श्रीलंका को 38 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद सप्लाई किए थे।"
यह बयान एक भरोसेमंद क्षेत्रीय सहयोगी के तौर पर भारत की लगातार बनी भूमिका को दिखाता है, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में ऊर्जा स्थिरता सुनिश्चित करने और सप्लाई से जुड़ी ज़रूरतों को पूरा करने के मामले में।