वैल्यू-एडेड चावल उत्पाद भारतीय उद्योग के लिए विकास के नए अवसर प्रदान करते हैं: IREF

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 30-09-2026
Value-added rice products offer new growth opportunities for Indian industry: IREF
Value-added rice products offer new growth opportunities for Indian industry: IREF

 

नई दिल्ली
 
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के अनुसार, चावल से बनने वाले वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स - जैसे कि आसानी से बनने वाले खाद्य पदार्थ (कन्वीनियंस फूड्स), ब्रान ऑयल, प्रोटीन और भूसी से बनने वाले इंडस्ट्रियल मटीरियल - भारत के चावल उद्योग के लिए विकास के नए अवसर खोल सकते हैं। इनसे व्यवसायों को अनाज के हर टन से अधिक कमाई करने में मदद मिल सकती है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 23-25 ​​अक्टूबर को होने वाली 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026' में इन अवसरों पर विचार किया जाएगा और IREF-EY के आकलन के आधार पर अच्छे प्रोडक्ट्स की पहचान की जाएगी।
 
IREF की ओर से बोलते हुए बासमती के प्रेसिडेंट राजीव सेठिया ने कहा, "अगला अवसर सिर्फ़ ज़्यादा टन चावल एक्सपोर्ट करने का नहीं है, बल्कि हर टन से ज़्यादा वैल्यू कमाने का है। मिलर, एक्सपोर्टर और इंग्रीडिएंट बनाने वाली कंपनियों के लिए अलग-अलग रास्ते होंगे।" चावल के नूडल्स और आसानी से बनने वाले खाद्य पदार्थ विकास का एक संभावित क्षेत्र हैं। IREF की प्रेस विज्ञप्ति में बताए गए 'ग्रैंड व्यू रिसर्च' के अनुमानों के अनुसार, ग्लोबल राइस-नूडल मार्केट के 2024 में 6.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2030 तक 11 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है, जिससे सालाना मार्केट वैल्यू में लगभग 4.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी होगी।
 
विज्ञप्ति में कहा गया है कि 2024 में मार्केट रेवेन्यू में एशिया-पैसिफिक का हिस्सा 63.4 प्रतिशत था, जो प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मार्केट में एंट्री करने की कोशिश कर रहे व्यवसायों के लिए एक शुरुआती बिंदु प्रदान करता है। चावल मिलर्स के लिए, ब्रान ऑयल प्रोसेसिंग से अतिरिक्त वैल्यू बनाने का अवसर देता है। 'ग्रैंड व्यू रिसर्च' के अनुमानों के अनुसार, ग्लोबल राइस-ब्रान-ऑयल मार्केट के 2023 में 4.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2030 तक 6.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
 
इसके अलावा, नीति आयोग की 2024 की खाद्य-तेल रिपोर्ट में भारत की राइस-ब्रान-ऑयल क्षमता का अनुमान 1.9 मिलियन टन लगाया गया था, जिसमें 8.5 लाख टन ऐसी क्षमता भी शामिल थी जिसका उस समय तक इस्तेमाल नहीं किया गया था। कॉन्फ्रेंस की चर्चाओं में चावल प्रोटीन, चावल का आटा और फंक्शनल स्टार्च जैसे खास इंग्रीडिएंट्स भी शामिल होंगे। ग्रैंड व्यू रिसर्च का हवाला देते हुए जारी बयान में कहा गया है कि ग्लोबल राइस-प्रोटीन मार्केट के 2023 में 168.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2030 तक 281.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है, जो लगभग 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
 
इस कॉन्फ्रेंस में ग्राहकों की ज़रूरतों, प्रोसेसिंग की ज़रूरतों और इन इंग्रीडिएंट्स के प्रोडक्शन की कमर्शियल व्यवहार्यता (व्यावसायिक रूप से सफल होने की संभावना) पर चर्चा की जाएगी। चावल के बाई-प्रोडक्ट्स (उप-उत्पादों) के इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के भी मौके हैं। बयान में दिए गए अनुमानों के अनुसार, ग्लोबल राइस-हस्क-ऐश-बेस्ड सिलिका मार्केट के 2025 में 640.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर से दोगुने से ज़्यादा होकर 2033 तक लगभग 1.41 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जिसमें 2025 में रबर और टायर का रेवेन्यू में 40 प्रतिशत हिस्सा होगा।
 
बयान में इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के उदाहरण के तौर पर गुडईयर (Goodyear) की उस घोषणा का ज़िक्र किया गया है जिसमें वे 2025 में अपने यूरोपियन ट्रक-रेसिंग टायरों में बेकार राइस हस्क ऐश से बनी सिलिका का इस्तेमाल करेंगे। सेतिया ने कहा, "BIRC 2026 में, हम आकर्षक मार्केट अनुमानों को उन बिज़नेस से अलग करना चाहते हैं जिन्हें असल में खड़ा किया जा सकता है - यानी ऐसे प्रोडक्ट्स, खरीदारों, इन्वेस्टमेंट की ज़रूरतों और पार्टनरशिप की पहचान करना जो संभावनाओं को कमर्शियल ग्रोथ में बदल सकें।"
 
IREF–EY असेसमेंट में डिमांड, हासिल किए जा सकने वाले मार्जिन, इन्वेस्टमेंट की ज़रूरतों, प्रोसेसिंग यील्ड, मार्केट तक पहुँच और एक्सपोर्ट की संभावनाओं की तुलना की जाएगी। इसमें प्रोसेसिंग कॉस्ट के बाद मुनाफ़े और भारतीय बिज़नेस असल में ग्लोबल ग्रोथ का कितना हिस्सा हासिल कर सकते हैं, इसका भी आकलन किया जाएगा।
कॉन्फ्रेंस का सेशन, "बियॉन्ड रॉ राइस: द नेक्स्ट बिलियन-डॉलर अपॉर्चुनिटी" (कच्चे चावल से आगे: अगला बिलियन-डॉलर का मौका), प्रीमियम और स्पेशलिटी चावल, रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट प्रोडक्ट्स और चावल के बाई-प्रोडक्ट्स के बेहतर इस्तेमाल पर केंद्रित होगा। चर्चा के तहत अन्य मौकों में साके (sake), इथेनॉल और बायोएनर्जी शामिल होंगे।