यूसीआईएल प्रमुख ने झारखंड में यूरेनियम खनन और स्वास्थ्य समस्याओं के बीच संबंध से इनकार किया

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-10-2026
UCIL chief denies link between uranium mining and health problems in Jharkhand
UCIL chief denies link between uranium mining and health problems in Jharkhand

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक काचम आनंद राव ने झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र में यूरेनियम खदानों और मिलों से निकलने वाले विकिरण को त्वचा संबंधी बीमारियों, कैंसर और जन्मजात विकृतियों जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण होने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बीमारियां मुख्य रूप से क्षेत्र के ‘‘पिछड़ेपन’’ और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ी हैं।
 
राव ने कहा कि राज्य में निकाले जाने वाले यूरेनियम अयस्क की गुणवत्ता बहुत कम है और एक टन अयस्क से केवल 200-300 ग्राम यूरेनियम निकाला जाता है।
 
उन्होंने कहा कि इसका स्वास्थ्य पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है।
 
राव ने जादूगोड़ा में बातचीत के दौरान कहा, ‘‘कुछ लोग जिन त्वचा संबंधी बीमारियों या कैंसर को यूरेनियम खदानों से जोड़ रहे हैं, उनका कारण यूरेनियम खनन नहीं है। क्षेत्र की स्थानीय परिस्थितियों और पिछड़ापन इनका कारण है। विभिन्न संगठनों ने कम से कम 10 वैज्ञानिक अध्ययन किए हैं, जिनसे साबित हुआ है कि यूरेनियम निकाले जाने और क्षेत्र में पाई जाने वाली बीमारियों के बीच कोई संबंध नहीं है।’’
 
यूसीआईएल, झारखंड में सात यूरेनियम खदानों में खनन कार्य करती है।
 
इनमें बागजाता, जादूगोड़ा, भाटिन, नरवापहाड़, तुरामडीह और मोहुलडीह में छह भूमिगत खदानें तथा बंदुहुड़ांग में एक खुली खदान शामिल है।