आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ बंद कमरे में हुई बैठक के बाद सैन्य गठबंधन की पुन: आलोचना करते हुए दोहराया कि जरूरत के समय नाटो अमेरिका के साथ नहीं था।
बैठक से पहले ट्रंप ने संकेत दिया था कि ईरान युद्ध के दौरान सहयोग नहीं मिलने पर अमेरिका नाटो से अलग होने पर विचार कर सकता है। बैठक के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर बड़े (कैपिटल) अक्षरों में लिखा, “नाटो हमारे साथ नहीं था जब हमें उसकी जरूरत थी और आगे जरूरत पड़ने पर भी नहीं होगा।”
व्हाइट हाउस ने इस पर तत्काल कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप नाटो से अलग होने के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।
ट्रंप और रुटे के बीच यह बैठक ऐसे समय हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी है, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का रास्ता साफ हुआ है।
अमेरिकी कांग्रेस 2023 में एक कानून पारित कर चुकी है, जिसके तहत कोई भी राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना नाटो से बाहर नहीं हो सकता।
ट्रंप लंबे समय से नाटो की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में भी संकेत दिया था कि वह गठबंधन से बाहर निकल सकते हैं।
नाटो की स्थापना 1949 में यूरोप की सुरक्षा के लिए की गई थी और इसके 32 सदस्य देशों के बीच सामूहिक रक्षा समझौता लागू है।
ट्रंप ने ईरान युद्ध के दौरान यह भी आरोप लगाया कि नाटो देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में अमेरिका का साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा था कि इस महत्वपूर्ण मार्ग की सुरक्षा उन देशों की जिम्मेदारी है, जो इसके जरिए तेल पर निर्भर हैं।