Treat internal financial controls as a business necessity, not a compliance: ICAI
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
देश के चार्टर्ड अकाउंटेंट का शीर्ष निकाय भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) के अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी ने कहा है कि कॉरपोरेट प्रशासन और जोखिम प्रबंधन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच मजबूत आंतरिक वित्तीय नियंत्रण को केवल अनुपालन की अनिवार्यता नहीं, बल्कि कारोबार की आवश्यकता के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आंतरिक नियंत्रण किसी भी कारोबार की बुनियाद होता है। इससे संस्थानों को जोखिमों की पहचान करने, वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने और निर्णय प्रक्रिया को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।
प्रसन्न कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘आंतरिक वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था केवल अनुपालन का विषय नहीं है, बल्कि यह स्वयं कारोबारी हित से जुड़ा मामला है। प्रत्येक उद्यमी के पास प्रभावी आंतरिक वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था होनी चाहिए।’’
उनकी यह टिप्पणी वित्तीय क्षेत्र में हाल में सामने आए कॉरपोरेट प्रशासन संबंधी मामलों की पृष्ठभूमि में आई है।
उन्होंने कहा, ‘‘कॉरपोरेट प्रशासन की व्यवस्था मौजूद रहती है, लेकिन उसमें हमेशा सुधार की गुंजाइश होती है। यदि कॉरपोरेट प्रशासन विफल होता है तो आंतरिक वित्तीय नियंत्रण प्रणाली भी विफल हो सकती है और अंततः संस्थान मुश्किलों में फंस सकता है।’’