कोलकाता
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर कथित हमले को लेकर उनके कार्यालय से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। भाजपा के एक नेता ने रविवार को इसकी जानकारी दी।
भाजपा के नेता ने बताया कि शुभेंदु अधिकारी का कार्यालय इस घटना से संबंधित वीडियो फुटेज और अन्य आवश्यक दस्तावेजों को गृह मंत्रालय को सौंपने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा, “गृह मंत्रालय ने शुभेंदु अधिकारी पर हुए हमले की घटना के संबंध में रिपोर्ट मांगी है। कार्यालय इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है और इसे जल्द ही मंत्रालय को भेज दिया जाएगा।”
घटना के संबंध में शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को दावा किया कि पश्चिम मेदिनीपुर जिले में तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने उनके काफिले पर हमला किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर घटना का वीडियो साझा करते हुए बताया कि यह हमला रात करीब 8:20 बजे हुआ, जब वे पुरुलिया से लौट रहे थे। अधिकारी ने कहा कि यह हमला पुलिस की मौजूदगी में हुआ, लेकिन पुलिस केवल “मूकदर्शक” बनी रही।
भाजपा नेता ने इसे राज्य में विपक्ष के खिलाफ बढ़ते दबाव और हिंसा का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की हताशा साफ दिखाई दे रही है और वे जनता की बढ़ती नाराजगी को दबाने के लिए गुंडागर्दी का सहारा ले रही हैं।
शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक, हमले के तुरंत बाद उनके सुरक्षाकर्मी और स्थानीय भाजपा समर्थकों ने स्थिति को नियंत्रण में लाते हुए सड़क को खाली कराया। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में भी चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि यह विपक्ष के नेताओं के खिलाफ सीधे हमले का मामला है।
इस आरोप पर फिलहाल पश्चिम बंगाल पुलिस या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। भाजपा का दावा है कि यह हमला न केवल व्यक्तिगत बल्कि राजनीतिक प्रतिरोध को दबाने की कोशिश का हिस्सा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट तलब करने की प्रक्रिया इस मामले की गंभीरता को दर्शाती है। मंत्रालय इस रिपोर्ट के आधार पर स्थिति का आकलन करेगा और आवश्यक सुरक्षा कदमों पर विचार करेगा। शुभेंदु अधिकारी की ओर से भेजी जाने वाली विस्तृत रिपोर्ट में हमले की घटनास्थल की स्थिति, वीडियो फुटेज और अन्य सबूत शामिल होंगे।
यह मामला राज्य में राजनीतिक तनाव और विपक्ष के नेताओं की सुरक्षा के मुद्दों को भी उजागर करता है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा और सुरक्षा उपायों पर ध्यान बढ़ सकता है।






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