The Supreme Court dismissed a petition challenging the holding of 'Kambala' outside two districts of Karnataka.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में ‘कंबाला’ (भैंसों की दौड़ प्रतियोगिता) के आयोजन के खिलाफ दायर याचिका मंगलवार को खारिज कर दी।
शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि इसे राज्य के केवल एक खास क्षेत्र तक ही क्यों सीमित रखा जाए।
कर्नाटक में नवंबर से मार्च के बीच आयोजित होने वाली कंबाला दौड़ में एक जोड़ी भैंसों को हल से बांधा जाता है और उन्हें एक व्यक्ति नियंत्रित करता है। उन्हें कीचड़ भरे समानांतर ट्रैक पर दौड़ाया जाता है, और सबसे तेज दौड़ने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ‘‘पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया’’ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पेटा ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 14 नवंबर के आदेश को चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय ने राज्य को दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों के बाहर किसी भी स्थान को कंबाला आयोजन के लिए अधिसूचित करने से रोकने की मांग खारिज कर दी थी।
न्यायमूर्ति मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘यदि वे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अपनी संस्कृति को प्रदर्शित करना चाहते हैं, तो इसमें क्या गलत है? राज्य के अन्य हिस्सों के लोगों को भी इस संस्कृति से परिचित होने दीजिए। इसे केवल किसी एक क्षेत्र तक ही क्यों सीमित रखा जाए?’’