The strategy of giving up tax revenue in the name of increasing consumption needs to be ended: Former Finance Secretary Garg
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने अगले महीने पेश होने वाले आम बजट में कर नीति को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने का सुझाव देते हुए कहा कि उपभोग बढ़ाने के नाम पर कर राजस्व छोड़ने की रणनीति ठीक नहीं है। उन्होंने साथ ही जोड़ा कि इससे आयकर तथा केंद्रीय जीएसटी, दोनों ही मदों में राजस्व को नुकसान हो रहा है।
गर्ग ने वैकल्पिक नई कर व्यवस्था को एकमात्र आयकर योजना बनाने की जरूरत बताते हुए कहा कि बचत को बढ़ावा देने के नाम पर और अधिक छूट नहीं देनी चाहिए। चाहे इक्विटी हो, बॉन्ड हो, बैंक जमा हो या म्यूचुअल फंड, कर नीति सभी प्रकार के निवेशों पर समान होनी चाहिए।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को लोकसभा में 2026-27 के लिए लगातार नौवीं बार आम बजट पेश कर सकती हैं।
गर्ग ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, ‘‘केंद्र सरकार का वित्त वर्ष 2026-27 का बजट कर राजस्व, व्यय और घाटे जैसे सभी प्रमुख मोर्चों पर बढ़ते दबाव के बीच तैयार किया जा रहा है। सरकार को कर नीति को सही करना होगा। उपभोग में अपेक्षित वृद्धि के लिए कर राजस्व छोड़ने से आयकर और केंद्रीय जीएसटी दोनों मोर्चों पर कर प्राप्तियों को नुकसान पहुंचा है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसी प्रकार, व्यय का दबाव भी बढ़ रहा है। इन सबके परिणामस्वरूप, घाटे को कम करना लगातार कठिन होता जा रहा है। वित्त मंत्री को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर वृद्धि सुदृढ़ आधार पर हो, व्यय व्यापक जनहित के अनुरूप हों और राजकोषीय घाटा नियंत्रण में रहे।’’
उल्लेखनीय है कि सरकार ने लोगों की जेबों में अधिक पैसा पहुंचाने के लिए एक तरफ जहां नई आयकर व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त किया है वहीं जीएसटी सुधारों के तहत दरों को युक्तिसंगत बनाया है। लेकिन इससे राजस्व प्राप्ति की गति धीमी हुई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 तक केंद्र सरकार की कुल आय 19.49 लाख करोड़ रुपये रही, जो कुल बजट अनुमान का 55.7 प्रतिशत है। इसमें से 13.94 लाख करोड़ रुपये कर राजस्व के रूप में मिले।
वहीं सकल जीएसटी संग्रह बीते माह दिसंबर में 6.1 प्रतिशत बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। करों में कटौती के बाद घरेलू बिक्री से होने वाले राजस्व में वृद्धि सुस्त रहने से जीएसटी संग्रह की रफ्तार नरम पड़ी है।
यह पूछे जाने पर कि क्या लघु बचत योजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए बजट में कुछ छूट दिये जाने की उम्मीद है, पूर्व वित्त सचिव ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि सरकार को बचत को बढ़ावा देने के नाम पर और अधिक छूट देनी चाहिए। चाहे वह इक्विटी हो, बॉन्ड हो, बैंक जमा हो या म्यूचुअल फंड, कर नीति सभी प्रकार के निवेशों पर समान होनी चाहिए।