नई दिल्ली
आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि आरएसएस और इसके संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, जिन्हें आमतौर पर "डॉक्टर साहब" कहा जाता है, का नाम ही पर्याय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरएसएस बदल नहीं रहा है, बल्कि समय के साथ विभिन्न रूपों में अपनी उपस्थिति प्रकट कर रहा है।
डॉ. भागवत यह बात दिल्ली के झंडेवाला में केशव कुंज में आयोजित कार्यक्रम में कह रहे थे, जहाँ उन्होंने फिल्म ‘100 Years of the Rashtriya Swayamsevak Sangh - शतक’ के दो गीत – ‘भारत माँ के बच्चे’ और ‘भगवा है मेरी पहचान’ – का विमोचन किया। इन गीतों को प्रसिद्ध गायक सुखविंदर सिंह ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. भागवत ने कहा, “संगठन और डॉक्टर साहब समानार्थक शब्द हैं।” उन्होंने बताया कि जब संगठन नए रूपों में विकसित होता है, तो लोग समझते हैं कि यह बदल रहा है, लेकिन वास्तव में यह केवल धीरे-धीरे प्रकट हो रहा है। उन्होंने इसे बीज के पेड़ में बदलने की प्रक्रिया से तुलना की और कहा कि डॉक्टर साहब का जीवन – उनकी विचारधारा और संगठन की आत्मा – इसी विकास में निहित है।
उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस संस्थापक डॉ. हेडगेवार की मानसिकता और जीवन दर्शन शोध का विषय हैं। डॉ. भागवत ने डॉक्टर साहब के बचपन की एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें 11 वर्ष की आयु में उनके माता-पिता एक ही दिन, एक घंटे के अंतराल में, दोनों का निधन हो गया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी सामान्यत: किसी को मानसिक रूप से प्रभावित कर सकती है, लेकिन डॉक्टर साहब के व्यक्तित्व पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा। “डॉक्टर साहब जन्म से ही देशभक्त थे। इतनी बड़ी चोट को सहन करते हुए उनका मानसिक स्वास्थ्य और मजबूत व्यक्तित्व उजागर होता है,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम में आरएसएस अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश (भैय्याजी) जोशी, गायक सुखविंदर सिंह, निर्माता वीर कपूर, निर्देशक आशीष माल और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
डॉ. भागवत के अनुसार, आरएसएस का आदर्श और डॉक्टर साहब का दृष्टिकोण आज भी संगठन के प्रत्येक कार्य और गतिविधि में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, और यह संगठन समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।