जमाअत ने विध्वंस कार्रवाई रोकने की मांग उठाई

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 17-06-2026
The Jamaat demanded a halt to the demolition drive.
The Jamaat demanded a halt to the demolition drive.

 

नई दिल्ली:

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने देश के विभिन्न हिस्सों में चल रही विध्वंस कार्रवाइयों, अमेरिका-ईरान शांति समझौते, राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया और पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने दिल्ली सहित देश के कई शहरों में चल रहे बुलडोजर और तोड़फोड़ अभियानों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर उचित कानूनी प्रक्रिया और पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था के बिना कार्रवाई की जा रही है, जिससे बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सप्ताहों में दिल्ली, फरीदाबाद, वाराणसी, संभल, जयपुर, सूरत, इटावा और महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में विध्वंस अभियान चलाए गए हैं। उनके अनुसार, अनेक परिवारों को अपने घरों और व्यवसायों से वंचित होना पड़ा है, जबकि उनके पुनर्वास को लेकर स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है।

मलिक मोतसिम खान ने कहा कि भीषण गर्मी और आगामी मानसून के बीच ऐसी कार्रवाइयों से प्रभावित लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि किसी भी कार्रवाई से पहले मानवीय पहलुओं और पुनर्वास की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित शांति समझौते का स्वागत किया। उन्होंने इसे पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद दोनों देशों के बीच संवाद और समझौता सकारात्मक संकेत है। जमाअत ने उम्मीद जताई कि समझौते की सभी शर्तों का ईमानदारी से पालन किया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसकी निगरानी में रचनात्मक भूमिका निभाएगा।

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा कि यदि यह समझौता सफल रहता है तो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सकता है और बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी तथा आर्थिक दबाव से जूझ रहे आम लोगों को राहत मिलने की संभावना बनेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद की पहल को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

राज्यसभा चुनावों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हॉर्स ट्रेडिंग, क्रॉस वोटिंग, राजनीतिक दबाव और धनबल के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

इस अवसर पर एपीसीआर (APCR) के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान ने पश्चिम बंगाल की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य के कुछ क्षेत्रों से राजनीतिक दबाव, विरोधी दलों के कार्यकर्ताओं पर कथित कार्रवाई और विस्थापन की आशंकाओं से जुड़ी रिपोर्टें सामने आई हैं। उनके अनुसार, किसी भी अवैध निर्माण पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है, लेकिन पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानूनी मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के नेताओं ने नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों से इन मुद्दों पर ध्यान देने और प्रभावित लोगों के साथ खड़े होने की अपील की। संगठन ने कहा कि देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी नागरिकों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।