The court sought a response from the Delhi Police on the activist's plea.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पुलिस से नागरिक अधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद वासिक नदीम खान के उस आरोप पर वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने खान की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में पुलिस द्वारा लगातार निगरानी किए जाने और फोन किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। पीठ ने पुलिसकर्मियों के आचरण पर दिल्ली पुलिस के वकील से सवाल भी किए।
पीठ ने माना कि पुलिस को प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार करने का अधिकार है, लेकिन सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से सवाल किया, ‘‘आप इस व्यक्ति के घर में कैसे घुस सकते हैं? आपको अपना कर्तव्य निभाने का अधिकार है, लेकिन आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? उसे रोककर रखने का आपके पास क्या आधार है?’’
याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि 29 सितंबर को दो पुलिसकर्मी उनके आवास-सह-कार्यालय पहुंचे और पूरे दिन उसे कहीं आने जाने नहीं दिया।
वकील ने आरोप लगाया कि खान की लगातार निगरानी की गई और अदालत से अनुरोध किया कि इस तरह के आचरण को ‘‘उत्पीड़न और मनमाना व्यवहार’’ घोषित किया जाए।
बनर्जी से इनमें से एक मामले में थाने में पहले ही पूछताछ की जा चुकी है। यह पूछताछ कई घंटे तक की गई थी।
पुलिस अब उसी मामले में उनसे फिर से पूछताछ करना चाहती है।