स्वतंत्रता संग्राम में संथाल समुदाय के योगदान को पर्याप्त मान्यता नहीं मिली: राष्ट्रपति मुर्मू

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 07-03-2026
The contribution of the Santhal community in the freedom struggle has not been adequately recognised: President Murmu
The contribution of the Santhal community in the freedom struggle has not been adequately recognised: President Murmu

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में संथाल समुदाय के योगदान को पर्याप्त मान्यता नहीं मिली है और समुदाय से जुड़ी कई महान हस्तियों के नाम ‘‘इतिहास में जानबूझकर शामिल नहीं किए गए।’’
 
मुर्मू ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में सिलीगुड़ी के बिधाननगर में नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन का उद्घाटन किया और संथाल बच्चों के लिए शिक्षा की जरूरत पर जोर दिया।
 
उन्होंने कहा, ‘‘मैं जानती हूं कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में संथालों का कितना योगदान रहा है, लेकिन संथाल महानायकों के नाम इतिहास में जानबूझकर शामिल नहीं किए गए।’’
 
राष्ट्रपति ने समुदाय से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि नयी पीढ़ी को उचित स्कूली शिक्षा मिले।
 
मुर्मू ने कहा, ‘‘मैं चाहती हूं कि संथाल समुदाय के सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले और इससे वे आत्मनिर्भर एवं अधिक मजबूत बनेंगे।’’
 
राष्ट्रपति ने कहा कि अवसरों का विस्तार करने के लिए समुदाय को ‘ओल चिकी’ के अलावा अन्य भाषाएं भी सीखनी चाहिए।
 
पंडित रघुनाथ मुर्मू ने 1925 में ‘ओल चिकी’ लिपि का आविष्कार किया था। तब से इसका इस्तेमाल संथाली भाषा के लिए किया जा रहा है। अब यह लिपि पूरी दुनिया में संथाल पहचान का एक सशक्त प्रतीक है। यह संथाल समुदाय के बीच एकता स्थापित करने का भी प्रभावी माध्यम है।