आवारा कुत्तों पर उच्चतम न्यायालय का आदेश संतुलित: विधि आयोग

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 16-01-2026
Supreme Court's order on stray dogs is balanced: Law Commission
Supreme Court's order on stray dogs is balanced: Law Commission

 

नयी दिल्ली

विधि आयोग की एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर अपने हालिया निर्देशों में “संतुलित दृष्टिकोण” अपनाया है। उनका कहना है कि यह दृष्टिकोण न केवल पशु अधिकारों का ध्यान रखता है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और उनकी जायज चिंताओं को भी नजरअंदाज नहीं करता।

विधि आयोग की सदस्य सचिव अंजू राठी राणा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में बताया कि अदालत ने आवारा कुत्तों से जुड़ी बढ़ती घटनाओं, विशेषकर काटने और संक्रमण के मामलों का ध्यान रखते हुए, पुराने निर्देशों में संशोधन किया है। इसके तहत नगर निकायों, स्वास्थ्य विभागों और राज्य प्राधिकरणों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया है, ताकि न्यायालय के निर्देश सुरक्षित शहरों और मानवीय, दीर्घकालिक उपायों में बदल सकें।

राणा ने बताया कि शीर्ष अदालत ने आवारा कुत्तों को पकड़ने, बंध्याकरण, टीकाकरण और कृमिनाशक दवा देने के लिए ‘पशु जन्म नियंत्रण नियम (एबीसी), 2023’ के अनुपालन का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या नियंत्रण का मूल आधार बनाते हैं। इसके अनुसार, आवारा कुत्तों का बंध्याकरण और टीकाकरण करके उन्हें उसी इलाके में वापस छोड़ा जाना है, जिससे तदर्थ निष्कासन न हो और नियम-आधारित प्रणाली स्थापित हो सके।

विधि आयोग की वरिष्ठ अधिकारी ने आगे बताया कि अदालत के आदेश में नगर निकायों की जवाबदेही को भी स्पष्ट किया गया है। इसमें नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, त्रैमासिक निरीक्षण और अनुपालन सुनिश्चित करने की व्यवस्था शामिल है। यह सुनिश्चित करता है कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए।

राणा ने जोर दिया कि केवल आदेश जारी करने से समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और सतत निगरानी जरूरी है। उन्होंने कहा, “यदि सभी संबंधित एजेंसियाँ नियमों का सही पालन करें और नियमित निरीक्षण करें, तो ये निर्देश न केवल कानूनी रूप से प्रभावी होंगे, बल्कि शहरों में सुरक्षित वातावरण और पशुओं के लिए भी मानवीय समाधान सुनिश्चित करेंगे।”

इस निर्णय को पशु अधिकारों और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश न केवल कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने में मदद करेगा, बल्कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य, पशु सुरक्षा और समुदाय में जागरूकता बढ़ाने में भी योगदान मिलेगा।