नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत को अपनी स्टार्टअप कंपनियों की नवाचार क्षमता और उद्यमियों के आत्मविश्वास पर पूरा भरोसा है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दशक में भारत को वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप रुझानों और प्रौद्योगिकी में नेतृत्व करना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल के एक दशक पूरा होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में स्टार्टअप संस्थापकों और उद्यमियों से नए विचारों पर काम करने, समस्याओं का समाधान खोजने और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि आने वाले 10 वर्षों में भारत स्टार्टअप रुझानों और प्रौद्योगिकी में दुनिया का नेतृत्व करे।”
मोदी ने कृत्रिम मेधा (एआई) सहित उभरती तकनीकों में भारत की अग्रणी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अब स्टार्टअप कंपनियों को विनिर्माण और अनुसंधान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि आज का शोध कल की बौद्धिक संपदा बनता है। इसके लिए शुरुआती पूंजी और सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कई योजनाएँ शुरू की हैं और पुराने एवं अप्रासंगिक नियमों को हटाया गया है।
प्रधानमंत्री ने देश की स्टार्टअप प्रगति का उदाहरण देते हुए कहा कि 2014 में भारत में केवल चार स्टार्टअप थे, जबकि आज यह संख्या दो लाख से अधिक हो गई है। देश में अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी स्टार्टअप पारिस्थितिकी मौजूद है और 125 से अधिक सक्रिय ‘यूनिकॉर्न’ कंपनियां हैं, जिनका मूल्य एक अरब डॉलर या उससे अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि कई यूनिकॉर्न कंपनियां अब अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर रही हैं।
मोदी ने मझोले और छोटे शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के स्टार्टअप में शामिल होने को भारत में उद्यमिता के विस्तार का संकेत बताया। उन्होंने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी जिक्र किया और कहा कि आज लगभग 45 प्रतिशत स्टार्टअप फर्मों में महिलाएं निदेशक या भागीदार हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जोखिम लेने की प्रवृत्ति अब हतोत्साहित नहीं की जाती, बल्कि यह सामान्य हो गई है। भारतीय स्टार्टअप संस्थापकों का आत्मविश्वास और महत्वाकांक्षा देश की नई पहचान बन रही है। उन्होंने स्टार्टअप संस्थापकों के साथ संवाद कर उनके उत्पादों और सेवाओं के बारे में जानकारी भी ली।
‘स्टार्टअप इंडिया’ अभियान की शुरुआत 16 जनवरी 2016 को नवाचार को बढ़ावा देने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और निवेश-आधारित वृद्धि को गति देने के उद्देश्य से की गई थी। इसका लक्ष्य भारत को नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला देश बनाना था।