सुप्रीम कोर्ट ने अर्दी फैमिली सेटलमेंट लागू करने की पहल की

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 25-09-2026
Supreme Court moves to implement Ardee family settlement, proposes Uttara Babbar as Advocate Commissioner
Supreme Court moves to implement Ardee family settlement, proposes Uttara Babbar as Advocate Commissioner

 

नई दिल्ली 
 
सुप्रीम कोर्ट ने Ardee Group के लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद में हुए समझौते को लागू करने की दिशा में एक और कदम उठाया है। कोर्ट ने समझौते की शर्तों को पूरा करने के लिए एडवोकेट कमिश्नर के तौर पर सीनियर एडवोकेट उत्तरा बब्बर का नाम प्रस्तावित किया है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने 23 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दोनों पक्ष बब्बर को यह भूमिका सौंपने के कोर्ट के प्रस्ताव पर सहमत हो गए हैं। उनके साथ एक एडवोकेट कमिश्नर भी होंगे जिन्होंने पहले ही कार्यान्वयन प्रक्रिया का कुछ हिस्सा पूरा कर लिया है।
 
कोर्ट ने कहा कि जिस मुद्दे पर ध्यान देने की ज़रूरत है, वह 5 फरवरी, 2026 के समझौता ज्ञापन (Memorandum of Settlement) की धारा 8 से संबंधित है। कोर्ट ने पक्षों को यह पता लगाने का निर्देश दिया कि क्या बब्बर समझौते को लागू करने के लिए ज़रूरी काम करने को तैयार हैं। इस मामले पर मुख्य कार्यवाही के साथ 6 अक्टूबर, 2026 को सुनवाई होनी है। यह कार्यवाही हरियाणा राज्य द्वारा यदुर कपूर के खिलाफ दर्ज FIR से जुड़ी है, जो चंडीगढ़ स्थित पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के 22 सितंबर, 2025 के फैसले और आदेश के बाद दर्ज की गई थी।
 
इस विवाद में दिवंगत रियल एस्टेट डेवलपर अशोक वर्मा के परिवार के सदस्य (जिनमें शेफाली वर्मा भी शामिल हैं) शामिल हैं। यह विवाद Ardee Group से जुड़े पारिवारिक व्यापारिक हितों, रियल एस्टेट होल्डिंग्स और अन्य संपत्तियों से संबंधित है। मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, समझौते की शर्तों के तहत शेफाली वर्मा को Ardee Mall, गोपाल दास और विजया बिल्डिंग्स और उनसे जुड़ी ज़मीनें मिलेंगी, जबकि पारिवारिक संपत्तियों के सहमत बंटवारे के तहत शिबानी वर्मा कपूर को ज़मीन के कुछ खास हिस्से मिलेंगे।
यह बंटवारा 5 फरवरी, 2026 को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया था।
 
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वर्तमान कार्यवाही संपत्तियों के बंटवारे पर नए सिरे से निर्णय लेने के बजाय समझौते को लागू करने से संबंधित है। ऊपर बताई गई संपत्ति का आवंटन समझौते की शर्तों और संबंधित उपलब्ध जानकारी को दर्शाता है और यह 23 सितंबर के आदेश में सुप्रीम कोर्ट का कोई निष्कर्ष नहीं है। ताज़ा कार्यवाही से पता चलता है कि भले ही पार्टियों ने समझौता कर लिया है, लेकिन इसे लागू करने के कुछ पहलू अभी भी बाकी हैं, खासकर वे जो क्लॉज़ 8 से जुड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट का उत्तरा बब्बर को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने का प्रस्ताव इस बात पर निर्भर करता है कि वह यह काम करने के लिए तैयार हैं या नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक एडवोकेट कमिश्नर ने समझौता लागू करने की दिशा में पहले ही कुछ प्रगति कर ली है।