आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पंजाब सरकार की पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई, जिसमें आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली सरकार से जुड़े लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने और दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई बुधवार या बृहस्पतिवार को करेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।
मामले को तत्काल सूचीबद्ध किए जाने का अनुरोध करते हुए सिंह ने कहा कि चुनाव के समय इस तरह के मामले उठाए जा रहे हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत यह देखेगी कि ऐसे कितने मामले हैं और तब तक कुछ नहीं होगा।
सिंह ने तत्काल सुनवाई के अपने अनुरोध पर जोर देते हुए कहा कि यह संघीय ढांचे के उल्लंघन का स्पष्ट मामला है।