आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ ने कहा है कि स्वस्थ पर्यावरण के मानवाधिकार की रक्षा के लिए वायु गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना और औद्योगिक एवं ऊर्जा उत्सर्जन का कड़ा विनियमन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण के मानव अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ एस्ट्रिड पुएंटेस रियानो ने हाल में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में एक नयी रिपोर्ट पेश की। उन्होंने सरकारों एवं उद्योगों से वायु प्रदूषण के कारण होने वाले जन स्वास्थ्य एवं मानवाधिकार संकट का समाधान निकालने का आह्वान किया।
रियानो ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक बयान में कहा कि विभिन्न देश वायु प्रदूषण के कारण मानवाधिकारों पर पड़ने वाले प्रभावों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने 'राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक' (एनएक्यूआई) और 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (एनसीएपी) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इस दिशा में कदम उठाए हैं।