मोंटेश्वर में सिद्दीकुल्ला चौधरी की जीत

Story by  अर्सला खान | Published by  [email protected] | Date 05-05-2026
Siddiqullah Chowdhary wins in Monteswar
Siddiqullah Chowdhary wins in Monteswar

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
पश्चिम बंगाल की राजनीति में मोंटेश्वर सीट ने इस बार एक बार फिर अनुभव और स्थिरता के पक्ष में फैसला दिया है। सिद्दीकुल्ला चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में करीब चालीस हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह जीत उनके लंबे राजनीतिक सफर और क्षेत्र में मजबूत पकड़ का प्रमाण मानी जा रही है।

मोंटेश्वर का राजनीतिक मिजाज अक्सर बदलता रहा है। यहां मतदाता हर चुनाव में अपने फैसले को लेकर गंभीर रहते हैं। ऐसे में लगातार भरोसा बनाए रखना आसान नहीं होता। लेकिन सिद्दीकुल्ला चौधरी ने अपने अनुभव और सक्रियता से इस भरोसे को कायम रखा है। उनका नाम उन नेताओं में आता है जो लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं और मंत्री पद की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
 
उनकी पहचान एक ऐसे नेता की है जो प्रशासनिक समझ और जमीनी जुड़ाव दोनों को साथ लेकर चलते हैं। मंत्री रहते हुए उन्होंने जो काम किए, उनका असर आज भी इलाके में देखा जाता है। यही वजह है कि लोग उन्हें सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक अनुभवी प्रतिनिधि के रूप में देखते हैं। चुनाव के दौरान यह विश्वास खुलकर सामने आया।
 
तृणमूल कांग्रेस के लिए यह जीत काफी अहम मानी जा रही है। मोंटेश्वर में इतना बड़ा अंतर यह संकेत देता है कि पार्टी की पकड़ यहां मजबूत बनी हुई है। सिद्दीकुल्ला चौधरी ने अपने संगठन को भी सक्रिय रखा, जिसका सीधा असर नतीजों में दिखाई दिया। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और तालमेल ने विपक्ष के लिए चुनौती खड़ी कर दी।
 
स्थानीय स्तर पर उनकी पहुंच और संवाद की शैली ने उन्हें लोगों के करीब रखा है। वे नियमित रूप से अपने क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं और लोगों की समस्याओं को सुनते हैं। यही निरंतरता उनके पक्ष में गई। चुनाव के दौरान भी उनकी सभाओं में स्थानीय मुद्दों की स्पष्ट झलक देखने को मिली, जिससे मतदाताओं को उनसे जुड़ाव महसूस हुआ।
 
यह जीत सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि एक लंबे राजनीतिक सफर की निरंतरता की कहानी है। सिद्दीकुल्ला चौधरी ने यह साबित किया है कि अनुभव और जमीन से जुड़ाव आज भी राजनीति में सबसे बड़ी ताकत है। मोंटेश्वर का जनादेश इसी सच्चाई को एक बार फिर सामने लाता है। उनकी यह जीत करीब 40,000 वोटों के मजबूत मार्जिन के साथ दर्ज हुई, जिसने उनके प्रभाव को और स्पष्ट कर दिया है।