नई दिल्ली
RK फैमिली ट्रस्ट को लेकर विवाद और गहरा गया है। रानी कपूर ने प्रिया कपूर को एक नया 'सीज़-एंड-डेसिस्ट' (काम रोकने का) नोटिस भेजा है, जिसमें उन्होंने दोहराया है कि अब वह ट्रस्टी के पद पर नहीं हैं और उन्हें तुरंत इस हैसियत से काम करना बंद कर देना चाहिए। 6 अप्रैल की तारीख वाला यह ताज़ा पत्र, 21 मार्च को भेजे गए एक पिछले नोटिस के बाद आया है। उस नोटिस में रानी कपूर ने 26 अक्टूबर, 2017 की ट्रस्ट डीड (दस्तावेज़) के प्रावधानों का हवाला देते हुए प्रिया कपूर को ट्रस्टी पद से हटाने की बात कही थी। इस पत्र के अनुसार, 15 दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद प्रिया कपूर को हटाने का फ़ैसला प्रभावी हो गया है, जिसके चलते 6 अप्रैल से ट्रस्टी के तौर पर प्रिया कपूर का बने रहना अब अमान्य माना जाएगा।
रानी कपूर ने प्रिया कपूर के 24 मार्च और 4 अप्रैल, 2026 के बाद के पत्रों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इन पत्रों में प्रिया ने कथित तौर पर रानी कपूर को ट्रस्टी पद से हटाने की कोशिश की थी। पत्र में कहा गया है कि प्रिया के ये कदम कानूनी रूप से टिकने लायक नहीं हैं और ट्रस्ट के भीतर रानी कपूर के अधिकार या दर्जे पर इनका कोई असर नहीं पड़ेगा। यह विवाद RK फैमिली ट्रस्ट से जुड़े कुछ बड़े सवालों से जुड़ा है। रानी कपूर पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रस्ट के गठन, उसमें संपत्तियों के हस्तांतरण और उसके कामकाज को लेकर सवाल उठा चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट के पास ऐसी संपत्तियां हैं जिन पर असल हक उनका है। उन्होंने ट्रस्ट के इस्तेमाल को, जून 2025 में अपने बेटे संजय कपूर की मृत्यु के बाद, उन्हें उनकी संपत्ति से बेदखल करने की एक कोशिश का हिस्सा बताया है।
हालांकि ये मामले अभी कोर्ट में लंबित हैं, फिर भी दोनों पक्ष ट्रस्ट डीड का ही सहारा ले रहे हैं। अपने नोटिस में, रानी कपूर ने खास तौर पर क्लॉज़ 8.12(i) का ज़िक्र किया है। उनका दावा है कि इस क्लॉज़ के तहत उन्हें बिना कोई कारण बताए किसी भी ट्रस्टी को हटाने का अधिकार मिला हुआ है। इसी क्लॉज़ का इस्तेमाल करते हुए, वह यह मानती हैं कि प्रिया कपूर को हटाया जाना पूरी तरह से वैध और बाध्यकारी है। इस पत्र में प्रिया कपूर के उस दावे का भी जवाब दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि रानी कपूर ट्रस्टी के तौर पर काम करने में सक्षम नहीं हैं। इस आरोप को खारिज करते हुए, रानी कपूर ने कहा है कि कानूनी मदद (न्यायिक हस्तक्षेप) लेना किसी भी तरह से 'अक्षमता' नहीं मानी जा सकती। बल्कि, यह तो लाभार्थियों (beneficiaries) के हितों की रक्षा करने के उनके कर्तव्य का ही एक हिस्सा है।
इसके अलावा, इस पत्र में यह भी बताया गया है कि दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से ऐसा कोई 'स्टे ऑर्डर' (रोक लगाने वाला आदेश) जारी नहीं किया गया है, जो ट्रस्ट के कामकाज पर किसी भी तरह की रोक लगाता हो। इसमें प्रिया कपूर के कामों में प्रक्रियागत कमियों पर भी रोशनी डाली गई है, जिसमें कहा गया है कि किसी भी ट्रस्टी को हटाने के लिए बाकी सभी ट्रस्टियों की मंज़ूरी ज़रूरी होती है—जो कि नहीं ली गई थी। रानी कपूर ने इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि प्रिया कपूर द्वारा ट्रस्टी के तौर पर हटाए जाने के बाद लिए गए कोई भी फ़ैसले बिना अधिकार के होंगे और उनके सिविल और क्रिमिनल नतीजे हो सकते हैं। उन्होंने प्रिया कपूर से कहा है कि वे RK फ़ैमिली ट्रस्ट से जुड़े सभी दस्तावेज़, रिकॉर्ड और सामान तुरंत सौंप दें।
इस चिट्ठी में यह साफ़ किया गया है कि यह कार्रवाई रानी कपूर के चल रहे कानूनी दावों पर कोई असर नहीं डालेगी, जिसमें ट्रस्ट की वैधता को चुनौती देना भी शामिल है। इसमें यह भी कहा गया है कि चाहे ट्रस्ट को आखिर में सही माना जाए या रद्द कर दिया जाए, नोटिस की अवधि खत्म होने के बाद प्रिया कपूर के पास ट्रस्टी के तौर पर काम करने का कोई अधिकार नहीं होगा। दिवंगत Sona Comstar के चेयरमैन संजय कपूर की बुज़ुर्ग माँ, रानी कपूर ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है और ट्रस्ट को रद्द करने तथा अपने परिवार की विरासत की सुरक्षा की गुहार लगाई है। यह मामला अभी कोर्ट में चल रहा है, और यह विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसमें दोनों पक्ष ट्रस्ट और उसकी संपत्तियों पर अपना अधिकार जता रहे हैं।