आरबीआई का बैंकों के लिए निवेश उतार-चढ़ाव आरिक्षित निधि को समाप्त करने का निर्णय

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 08-04-2026
RBI decides to abolish investment volatility reserve for banks
RBI decides to abolish investment volatility reserve for banks

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को निवेश मूल्य में गिरावट से बचाव के लिए बैंकों के अतिरिक्त बफर, निवेश उतार-चढ़ाव आरक्षित निधि (आईएफआर) को समाप्त करने का निर्णय लिया। यह निर्णय बैंकों की पूंजी पर्याप्तता को समर्थन देने के लिए उठाया गया है।

बैंक वर्तमान में मार्क टू मार्केट (एमटीएम) आवश्यकताओं के तहत, अपने निवेश के मूल्य में गिरावट से बचाव (हेजिंग) के लिए अतिरिक्त बफर के रूप में आईएफआर बनाए रखते हैं।
 
मार्क टू मार्केट एक वित्तीय लेखांकन पद्धति है जो किसी परिसंपत्ति या पोर्टफोलियो के मूल्य को उसकी मूल लागत के बजाय वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर दर्ज करती है।
 
वर्तमान में, वाणिज्यिक बैंक (लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) बाजार जोखिम के लिए पूंजी प्रभार बनाये रखते हैं और निवेश पोर्टफोलियो के वर्गीकरण, मूल्यांकन और संचालन पर संशोधित मानदंडों का पालन भी करते हैं।
 
आरबीआई ने विकासात्मक और नियामक नीतियों पर बयान में कहा कि लागू विवेकपूर्ण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, ऐसे वाणिज्यिक बैंकों के लिए आईएफआर की आवश्यकता को समाप्त करने का प्रस्ताव है।
 
अन्य बैंक श्रेणियों के लिए मौजूदा दिशानिर्देशों को भी संशोधित किया जा रहा है। ताकि आईएफआर पर नियामकीय सीमाओं का अनुपालन करने में ऐसे बैंकों के समक्ष आने वाली परिचालन चुनौतियों का समाधान किया जा सके और बैंक श्रेणियों में निर्देशों को सुसंगत बनाया जा सके, जिससे नियामक स्पष्टता और स्थिरता में वृद्धि हो। इस संबंध में दिशा-निर्देश का मसौदा जल्द ही सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा।