पंजाब में 2022 के बाद से पराली जलाने के मामले घटकर लगभग एक-तिहाई रह गए हैं: AAP विधायक अजय गुप्ता

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 06-10-2026
Punjab stubble-burning cases down to nearly one-third since 2022: AAP MLA Ajay Gupta
Punjab stubble-burning cases down to nearly one-third since 2022: AAP MLA Ajay Gupta

 

चंडीगढ़ (पंजाब) 
 
आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अजय गुप्ता ने मंगलवार को दावा किया कि 2022 में AAP सरकार के सत्ता में आने के बाद से पंजाब में पराली जलाने के मामलों में काफी कमी आई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसी घटनाओं की संख्या पहले के स्तर की तुलना में लगभग एक-तिहाई रह गई है। ANI से बात करते हुए गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए कई तरह के उपाय अपनाए हैं, जिनमें जागरूकता अभियान, किसानों को शिक्षित करना और पराली के प्रबंधन के लिए सब्सिडी वाली मशीनरी उपलब्ध कराना शामिल है।
 
गुप्ता ने कहा, "2022 में हमारी सरकार के सत्ता में आने के बाद से हमने पराली जलाने के मामलों में काफी कमी देखी है। यह पहले के मुकाबले लगभग एक-तिहाई रह गया है। सरकार इस मुद्दे को लेकर बहुत गंभीर है।" उन्होंने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के प्रयासों में जिला प्रशासन, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कृषि विभाग और सहकारी समितियां शामिल हैं। गुप्ता ने कहा कि किसानों को फसल के अवशेषों को गांठों (बेल्स) और छर्रों (पेलेट्स) में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनका इस्तेमाल चीनी मिलों और ईंट-भट्टों जैसे उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है। उन्होंने 'इन-सीटू' (खेत में ही) पराली प्रबंधन मशीनरी का भी ज़िक्र किया, जो पराली को जलाने के बजाय उसे मिट्टी में मिला देती है।
 
उन्होंने कहा, "इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और प्रदूषण भी नहीं होता। फसल के अवशेषों में मौजूद पोषक तत्व, जैसे नाइट्रोजन और फास्फोरस, मिट्टी में ही बने रहते हैं और अगली फसल को फायदा पहुंचाते हैं।" पराली जलाना जारी रखने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर गुप्ता ने कहा कि नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार की प्राथमिकता किसानों को दंडित करने के बजाय उन्हें शिक्षित करना और सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
 
उन्होंने कहा, "हम अपने किसान भाइयों को दंडित नहीं करना चाहते, जो देश का पेट भरते हैं। हमारी प्राथमिकता उन्हें शिक्षित करना और सुविधाएं देना है।" इस बीच, NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और उन पर नियंत्रण पाने के लिए अपने समन्वित फील्ड-स्तरीय निगरानी तंत्र को और तेज़ कर दिया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, निगरानी व्यवस्था के तहत पंजाब और हरियाणा के चिन्हित जिलों में 'फ्लाइंग स्क्वाड' तैनात किए गए हैं। इस तैनाती में पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिले शामिल हैं, जिससे धान की कटाई के अहम समय के दौरान दोनों राज्यों में बड़े पैमाने पर ज़मीनी स्तर पर निगरानी की जा सकेगी।
 
CAQM संबंधित राज्य सरकारों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और जिला प्रशासनों के साथ मिलकर धान की पराली जलाने से रोकने के उपायों के कार्यान्वयन की लगातार निगरानी, ​​समन्वय और समीक्षा कर रहा है। आयोग ने इस बात पर फिर से ज़ोर दिया है कि सीज़न के दौरान पराली जलाने से रोकने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के ठोस प्रयासों के साथ-साथ किसानों और अन्य हितधारकों के सक्रिय सहयोग और मदद की ज़रूरत है।