प्रोफ़ेशनल सर्विस सेक्टर में सुधार से भारत के ग्लोबल सर्विस एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिल सकता है

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 17-08-2026
Professional services reforms could boost India's global services exports
Professional services reforms could boost India's global services exports

 

नई दिल्ली 
 
नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, स्पष्टता, प्रोफेशनल मोबिलिटी (पेशेवरों की आवाजाही), योग्यता की मान्यता और 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' (कारोबार में आसानी) को बेहतर बनाने के मकसद से किए गए रेगुलेटरी सुधार भारत को अपने प्रोफेशनल सर्विस सेक्टर की पूरी एक्सपोर्ट क्षमता का इस्तेमाल करने में मदद कर सकते हैं।
'इंडियाज़ सर्विसेज़ सेक्टर: इनसाइट्स ऑन रेगुलेटरी रिजीम इन प्रोफेशनल सर्विसेज़' (भारत का सर्विस सेक्टर: प्रोफेशनल सर्विस में रेगुलेटरी व्यवस्था पर जानकारी) नाम की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रोफेशनल सर्विस भारत की सर्विस इकॉनमी का एक अहम हिस्सा बन गई हैं और इनमें ग्लोबल सर्विस ट्रेड में देश की स्थिति को मजबूत करने की काफी क्षमता है।
 
2024 में भारत दुनिया में सर्विस का सातवां सबसे बड़ा एक्सपोर्टर था, जिसकी ग्लोबल सर्विस एक्सपोर्ट में 4.3 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। 2024-25 में भारत के कुल सर्विस एक्सपोर्ट में प्रोफेशनल और मैनेजमेंट कंसल्टिंग सर्विस की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारत के कुल सर्विस एक्सपोर्ट में प्रोफेशनल सर्विस की हिस्सेदारी 19.7 प्रतिशत थी और FY15-FY25 के दौरान इनकी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 18 प्रतिशत दर्ज की गई।
 
रिपोर्ट में कहा गया है, "प्रोफेशनल सर्विस व्यापक सर्विस सेक्टर में अहम भूमिका निभाती हैं और ग्लोबल सर्विस ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की इनमें बहुत क्षमता है।" रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रोफेशनल सर्विस को रेगुलेट करने वाला ढांचा अलग-अलग और सेक्टर-स्पेसिफिक (क्षेत्र-विशेष) है। जहां मेडिकल, कानून, अकाउंटिंग और ऑडिटिंग जैसे प्रोफेशन के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचे बने हुए हैं, वहीं इंजीनियरिंग, लैंडस्केप आर्किटेक्चर और अर्बन प्लानिंग जैसे क्षेत्रों में या तो रेगुलेशन कम हैं या फिर औपचारिक निगरानी का अभाव है।
 
इसमें कई ऐसी रेगुलेटरी शर्तों की पहचान की गई है जो मार्केट में एंट्री और इंटरनेशनल कॉम्पिटिटिवनेस (अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता) पर असर डाल सकती हैं, जैसे कि नेशनैलिटी और रेजिडेंसी की शर्तें, शैक्षणिक योग्यता, लाइसेंसिंग, विदेशी योग्यताओं को मान्यता और कारोबार शुरू करने के तरीकों पर पाबंदियां। स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत में योग्यता, लाइसेंसिंग, प्रोफेशनल क्षमता की मान्यता और सेक्टर-स्पेसिफिक पाबंदियों से जुड़ी चुनौतियों पर भी बात हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत ज़्यादा सख्त घरेलू रेगुलेशन भारतीय और विदेशी सर्विस प्रोवाइडर्स, दोनों के लिए रुकावटें पैदा कर सकते हैं। इसमें कहा गया, "बहुत ज़्यादा सख्त रेगुलेशन घरेलू और विदेशी सर्विस प्रोवाइडर्स, दोनों के लिए बड़ी रुकावटें पैदा कर सकते हैं।"
 
इस पृष्ठभूमि में, रिपोर्ट में चार-सूत्रीय रणनीति का प्रस्ताव दिया गया है, जो लगातार प्रोफेशनल डेवलपमेंट, सर्विस वैल्यू चेन में प्रोफेशनल सर्विस को बेहतर बनाने, बेस्ट प्रैक्टिस को अपनाने और उभरते ट्रेंड्स को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। इसमें सेक्टर-खास उपायों की रूपरेखा भी बताई गई, जैसे कि नियमों में तालमेल और स्पष्टता, ज़्यादा प्रोफेशनल मोबिलिटी, आपसी मान्यता समझौते, आसान रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रक्रियाएं, प्रोफेशनल प्रैक्टिस के लिए व्यापक कानूनी ढांचे, और विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए चरणबद्ध मान्यता प्रक्रियाएं।
 
कानूनी सेवाओं के लिए, रिपोर्ट में वकीलों के अलावा अन्य कानूनी प्रोफेशनल्स को मान्यता देने, प्रैक्टिस के कानूनी तरीकों को आधुनिक बनाने और विज्ञापन के नियमों की समीक्षा करने की बात कही गई। अकाउंटिंग और ऑडिटिंग के क्षेत्र में, इसने मज़बूत रेगुलेटरी निगरानी और स्किलिंग की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जबकि आर्किटेक्चर के लिए आसान रजिस्ट्रेशन, प्रोफेशनल परीक्षाओं और विदेशी क्वालिफिकेशन को मान्यता देने के तरीकों का सुझाव दिया।
 
इंजीनियरिंग के लिए, रिपोर्ट ने प्रोफेशनल प्रैक्टिस को नियंत्रित करने वाले एक व्यापक कानूनी ढांचे की कमी की ओर इशारा किया, खासकर कंस्ट्रक्शन और उससे जुड़े कामों में लगे इंजीनियरों के लिए। इसमें कहा गया कि एक व्यवस्थित ढांचा निरंतरता, जवाबदेही और स्पष्टता में सुधार ला सकता है। रिपोर्ट में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि सुधारों के साथ-साथ स्किलिंग, प्रोफेशनल मोबिलिटी और ग्लोबल स्तर पर अपनाए जाने वाले बेहतरीन तरीकों को भी अपनाया जाना चाहिए। इसमें कहा गया कि प्रस्तावित उपायों से "प्रोफेशनल सेवाओं में दक्षता और आउटपुट बढ़ सकता है, जिससे भारत के सेवा व्यापार को बढ़ावा मिलेगा"।
 
स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत, मुख्य जानकारों के इंटरव्यू और व्यापार व रेगुलेटरी डेटा के विश्लेषण पर आधारित इस स्टडी में कहा गया कि एक ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रोफेशनल सेवा इकोसिस्टम भारत में उच्च-कौशल वाले रोज़गार, उद्यमिता और इनोवेशन की क्षमता को मज़बूत कर सकता है और साथ ही देश की व्यापक सेवा-आधारित विकास यात्रा में भी मदद कर सकता है।