आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को लेखक रघुनाथ मुर्मू की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अपनी दूरदर्शिता के जरिए उन्होंने संथाली भाषा को एक नयी पहचान दी।
संथाली भाषा के लिए ‘ओल चिकी’ लिपि विकसित करने वाले रघुनाथ का जन्म 1905 में ओडिशा के मयूरभंज जिले के रायरंगपुर के पास डांडबोस गांव में हुआ था।
राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मु की जयंती पर मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता और सृजनशीलता के द्वारा संथाली भाषा को नयी पहचान दी।’’
रायरंगपुर क्षेत्र से ही संबंध रखने वालीं राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ‘‘ओल चिकी लिपि के माध्यम से संथाली भाषा में शिक्षा, साहित्य और अभिव्यक्ति को बढ़ावा मिला तथा संथाल समुदाय के समग्र विकास को गति मिली।’’