देश की 60 प्रतिशत आबादी युवा है, लेकिन उन्हें क्या सिखाया? , पीएम मोदी पर बरसे ओवैसी

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 07-02-2026
60 percent of the country's population is young, but what have they been taught? Owaisi lashed out at PM Modi.
60 percent of the country's population is young, but what have they been taught? Owaisi lashed out at PM Modi.

 

निज़ामाबाद (तेलंगाना)

: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए देश की युवा आबादी के लिए रोजगार और कौशल विकास की कमी का मुद्दा उठाया है। शुक्रवार को निज़ामाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि सरकार युवा जनसंख्या को “डेमोग्राफिक डिविडेंड” बताती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उनके लिए ठोस अवसर दिखाई नहीं देते।

ओवैसी ने संसद में प्रधानमंत्री मोदी के हालिया भाषण का ज़िक्र करते हुए कहा कि पीएम ने राज्यसभा में कहा था कि दुनिया के कई देशों की आबादी बूढ़ी हो रही है, जबकि भारत आज भी युवा देश है। इस पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने कहा,
“अगर देश की 60 प्रतिशत आबादी 40 साल से कम उम्र की है, तो आपने इन युवाओं को कौन से कौशल सिखाए? उनके लिए कौन-सी नौकरियां पैदा कीं?”

उन्होंने कहा कि केवल युवा आबादी का होना अपने आप में उपलब्धि नहीं है, जब तक सरकार उनके लिए शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार की ठोस योजना न बनाए। ओवैसी के मुताबिक, “युवा हाथों में काम नहीं होगा, तो यह ताकत बोझ में बदल सकती है।”

RSS और मोहन भागवत पर भी निशाना

ओवैसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयानों में “विरोधाभास” का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून की बात की गई और मुसलमानों को निशाना बनाया गया, लेकिन अब वही लोग तीन बच्चे पैदा करने की सलाह दे रहे हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मोहन भागवत खुद तो ऐसा नहीं कर रहे, लेकिन लोगों को नसीहत दे रहे हैं। अब उन्हें समझ आ रहा है कि 20–30 साल बाद देश की आबादी बूढ़ी होने लगेगी और इसका असर क्या होगा।”

ऐतिहासिक संदर्भ और ‘बदले’ की राजनीति पर सवाल

ओवैसी ने पूर्व RSS प्रमुख एम. एस. गोलवलकर का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने खुद लिखा था कि सोमनाथ मंदिर की लूट में हिंदू राजा भी शामिल थे। इसके बाद ओवैसी ने ‘इतिहास का बदला लेने’ की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा,
“कोई कहता है सोमनाथ का बदला लेंगे, कोई रावण की क्रूरता का बदला, कोई महाभारत की बात करता है। दिल्ली में सिखों का खून बहा, उसका बदला कौन लेगा? देश में करोड़ों बच्चे भूखे सोते हैं, उसका बदला कौन लेगा?”

उन्होंने कहा कि बदले की भाषा छोड़कर देश को बदलने की ज़रूरत है—रोज़गार, शिक्षा और इंसाफ़ के ज़रिये।

गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में भारत की युवा आबादी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया था और वैश्विक स्तर पर बढ़ती बुज़ुर्ग आबादी को चुनौती करार दिया था। ओवैसी का कहना है कि अगर इस ताकत को सही दिशा नहीं दी गई, तो इसके गंभीर सामाजिक और आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।