Patent Office warns lawyers against luring clients through digital advertisements
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारतीय पेटेंट कार्यालय सीजीपीटीडीएम ने अधिवक्ताओं और उनके एजेंट को ऑनलाइन मंचों के जरिये विज्ञापन देने और ग्राहकों को लुभाने के खिलाफ आगाह किया है।
पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेडमार्क महानियंत्रक कार्यालय (सीजीपीटीडीएम) ने सार्वजनिक नोटिस में कहा कि ऐसी गतिविधियां अधिवक्ता अधिनियम, 1961 का उल्लंघन हैं।
सीजीपीटीडीएम ने कहा कि उसने कुछ ऐसी संस्थाओं का ‘गंभीरतापूर्वक’ संज्ञान लिया है जो विभिन्न ऑनलाइन मंचों के माध्यम से कानूनी सेवाएं प्रदान करने वाले अन्य वकीलों/एजेंट के संभावित आवेदकों या ग्राहकों को लुभाने के विज्ञापन देने की गतिविधियों में संलग्न हैं।
इसमें कहा गया, ‘‘ इस तरह की गतिविधियां अधिवक्ता अधिनियम, 1961 और उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन हैं जो अधिवक्ताओं और कानूनी एजेंट को कानूनी सेवाओं के लिए आग्रह करने या उनका प्रचार करने से सख्ती से प्रतिबंधित करते हैं।’’
इसमें साथ ही यह भी कहा गया कि कुछ संस्थाएं अपना प्रचार कर रही हैं और हितधारकों से संपर्क कर रही हैं ताकि वे अपनी ऑनलाइन पंजीकरण सेवाओं के माध्यम से भारत में कहीं से भी अपने ट्रेडमार्क (ब्रांड नाम, प्रतीक चिह्न, नारा, प्रतीक) को पंजीकृत करने में उनकी मदद कर सकें।
सीजीपीटीडीएम ने 17 संस्थाओं के नाम बताए हैं।
इसमें कहा गया, ‘‘ यह स्पष्ट किया जाता है कि ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 और ट्रेडमार्क नियम, 2017 के प्रावधानों के अनुसार ‘पंजीकृत ट्रेडमार्क एजेंट’ और/या अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के अनुरूप ‘‘वकील’’ ही ट्रेड मार्क रजिस्ट्रार के समक्ष वकालत करने के लिए अधिकृत हैं।’’
नोटिस में कहा गया, ‘‘ संबंधित पक्षों को तदनुसार आगाह किया जाता है।’’
इसमें आगे कहा गया है कि ट्रेडमार्क आवेदन ऑफलाइन या ऑनलाइन माध्यम से आवेदकों द्वारा सीधे या विधिवत अधिकृत अधिवक्ताओं या पंजीकृत ट्रेडमार्क एजेंट के माध्यम से ही दाखिल किए जा सकते हैं।
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