ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने शिवाजी महाराज से संबंधित सामग्री पर सार्वजनिक माफी मांगी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 07-01-2026
Oxford University Press has issued a public apology for the controversial material related to Shivaji Maharaj.
Oxford University Press has issued a public apology for the controversial material related to Shivaji Maharaj.

 

पुणे,

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (ओयूपी) इंडिया ने छत्रपति शिवाजी महाराज के 13वें वंशज उदयनराजे भोसले और जनता से दो दशक से अधिक पुराने विवादित बयानों के लिए सार्वजनिक माफी मांगी है। यह विवाद 2003 में प्रकाशित अमेरिकी लेखक जेम्स लेन की पुस्तक “Shivaji: Hindu King in Islamic India” को लेकर उभरा था।

ओयूपी इंडिया ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित सार्वजनिक सूचना में स्वीकार किया कि इस पुस्तक के पृष्ठ 31, 33, 34 और 93 पर दिये गए कुछ कथन अप्रमाणित और अपुष्ट थे। प्रकाशक ने स्पष्ट किया कि इन बयानों के प्रकाशन से किसी प्रकार की गलतफहमी या आघात हुआ हो तो इसके लिए वह खेद व्यक्त करता है।

यह विवाद पहली बार जनवरी 2004 में तब सामने आया था जब पुणे के भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (बोरी) में संभाजी ब्रिगेड के लगभग 150 कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की थी। उनका आरोप था कि संस्थान ने लेखक की मदद की थी और पुस्तक में शिवाजी महाराज के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। इस घटना ने तत्कालीन समय में बड़े स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं और इतिहास व संस्कृति प्रेमियों के बीच तीखी बहस छेड़ दी थी।

नोटिस में ओयूपी ने कहा कि यह माफी विशेष रूप से छत्रपति उदयनराजे भोसले और आम जनता के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता के भाव को दर्शाती है। उन्होंने इस मामले में हुई किसी भी पीड़ा, आघात या असंतोष के लिए खेद व्यक्त किया।

ओयूपी के पूर्व प्रबंध निदेशक सईद मंजर खान की ओर से जारी माफीनामे में यह भी कहा गया कि संस्था इतिहास और संस्कृति के प्रति हमेशा जिम्मेदार रही है और भविष्य में ऐसी त्रुटियों से बचने के लिए और अधिक सावधानी बरती जाएगी।

इस माफी ने उस विवादित अध्याय को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के सार्वजनिक क्षमापत्र से न केवल प्रतिष्ठान की विश्वसनीयता बढ़ती है, बल्कि इतिहास और सांस्कृतिक संवेदनाओं के प्रति सम्मान भी स्थापित होता है।

ओयूपी ने स्पष्ट किया कि पुस्तक में सुधार और तथ्य-जांच के नए संस्करण पर विचार किया जा रहा है, ताकि पाठकों को सही और संतुलित जानकारी मिल सके।