One year after cash-at-home row, Allahabad HC Judge Yashwant Varma resigns, probe continues
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने भारत के राष्ट्रपति को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। 9 अप्रैल, 2026 की तारीख़ वाले अपने इस्तीफ़े के पत्र में उन्होंने कहा है कि वह "तत्काल प्रभाव से" अपने पद से हट रहे हैं। राष्ट्रपति को लिखे पत्र में जस्टिस वर्मा ने लिखा कि वह अपने फ़ैसले के पीछे के कारणों का बोझ इस पद पर नहीं डालना चाहते, लेकिन इस्तीफ़ा देते समय उन्होंने "गहरा दुख" व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज के तौर पर सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही है। इस्तीफ़े की एक कॉपी भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी भेजी गई है।
जस्टिस वर्मा का पहले दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट में तबादला कर दिया गया था। यह तबादला उनके घर पर कथित तौर पर कैश मिलने से जुड़े एक विवाद के बाद हुआ था। उन्होंने 5 अप्रैल, 2025 को इलाहाबाद में शपथ ली थी। उनका इस्तीफ़ा ऐसे समय में आया है जब उनके ख़िलाफ़ एक आंतरिक जाँच चल रही है, और इन आरोपों के संबंध में संसद द्वारा उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है।
जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कथित कैश मिलने के मामले में आरोपों की जाँच कर रही एक संसदीय समिति ने, महाभियोग से जुड़ी जाँच के तहत, 13 मार्च से 21 मार्च तक रोज़ाना सुनवाई की थी। यह सुनवाई जस्टिस वर्मा द्वारा समिति को दिए गए लिखित जवाब के बाद हुई थी। अपने जवाब में उन्होंने इस बात से इनकार किया था कि कथित घटना के दौरान बरामद हुआ कोई भी कैश उनका था। उन्होंने यह भी कहा था कि जिस आग की घटना के दौरान कथित तौर पर कैश मिला था, उस समय वह वहाँ मौजूद नहीं थे।
जस्टिस वर्मा ने समिति के सामने यह भी कहा कि उनके घर से कोई कैश बरामद नहीं हुआ था। उन्होंने इन आरोपों को ग़लत बताया और अपने पहले के रुख़ को दोहराया। महाभियोग की संभावित प्रक्रिया के संदर्भ में इस मामले की जाँच के लिए गठित संसदीय समिति, रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेज़ों, जवाबों और अन्य सामग्री की समीक्षा कर रही है। उम्मीद है कि सुनवाई पूरी होने के बाद समिति अपने निष्कर्षों पर विचार-विमर्श करेगी।