लखनऊ
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने गुरुवार को अपने 70वें जन्मदिवस के अवसर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी पार्टी हर साल इस दिन को “जनकल्याणकारी दिवस” के रूप में मनाती है। इस मौके पर पार्टी के वरिष्ठ सदस्य उन कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा करते हैं, जो उनके नेतृत्व में BSP सरकार के चार कार्यकालों के दौरान समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए लागू की गई थीं।
मायावती ने कहा, "आज मेरा 70वां जन्मदिन है और मैं इस अवसर पर सभी को नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं देती हूं। मेरे पार्टी कार्यकर्ता इसे जनकल्याणकारी दिवस के रूप में मनाते हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ सदस्य विशेष रूप से उन योजनाओं पर चर्चा करते हैं, जो मेरी सरकार द्वारा आम जनता के लाभ के लिए लागू की गई थीं।"
उन्होंने दावा किया कि बीएसपी ने योजनाओं को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू किया गया। इसके परिणामस्वरूप सर्व समाज के विभिन्न वर्गों, जैसे गरीब मजदूर, बेरोजगार, किसान, व्यापारियों, श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं, छात्रों और संवेदनशील अल्पसंख्यक समूहों—दलित, आदिवासी और मुस्लिम समुदाय—की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
मायावती ने वर्तमान केंद्रीय और राज्य सरकारों पर आरोप लगाया कि वे बीएसपी की कल्याणकारी योजनाओं की नकल करके उन्हें नाम बदलकर चला रही हैं, लेकिन लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा क्योंकि उनकी इरादे अच्छे नहीं हैं। उन्होंने कहा, "राजनीतिक लाभ के लिए कुछ हमारी योजनाओं की नकल की जा रही है, लेकिन उनकी मंशा सही नहीं होने के कारण जनता को ज्यादा फायदा नहीं मिल रहा।"
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने दलित और अन्य पिछड़े समुदायों में जन्मे महान संत, गुरु और प्रमुख हस्तियों को सम्मान और आदर दिया। कई नए जिले उनके नाम पर बनाए गए और आम जनता के लिए कई योजनाएं लागू की गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकारों का अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति रवैया हमेशा दोहरे मापदंड वाला और दिखावटी रहा है।
मायावती ने विशेष रूप से महात्मा ज्योतिराव फुले और छत्रपति शाहूजी महाराज जैसे नेताओं का स्मरण करते हुए कहा कि BSP सरकार ने उनकी विरासत और योगदान को मान्यता दी और उनके नाम पर कई जनकल्याणकारी पहल शुरू कीं, जिन्हें अब विरोधी सरकारें अपने राजनीतिक लाभ के लिए अपनाने की कोशिश कर रही हैं।