आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
सिख परंपराओं और सिद्धांतों के बारे में कथित टिप्पणियों को लेकर तलब किए जाने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान बृहस्पतिवार को अमृतसर में अकाल तख्त सचिवालय के समक्ष पेश हुए।
मान बुधवार को अमृतसर पहुंचे। उन्होंने बृहस्पतिवार को अकाल तख्त सचिवालय में पेश होने से पहले स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका।
मुख्यमंत्री पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे अकाल तख्त सचिवालय में दाखिल हुए।
अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पिछले सप्ताह मान को ‘गुरु की गोलक’ (गुरुद्वारे की दानपेटी) पर कथित तौर पर टिप्पणी करने तथा ‘‘सिख गुरुओं’’ और मारे गए आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ ‘‘आपत्तिजनक गतिविधियों’’ में लिप्त पाए जाने के आरोप में तलब किया था।
सिखों की सर्वोच्च धार्मिक पीठ के जत्थेदार ने कहा था कि मान ने जानबूझकर ‘‘सिख विरोधी मानसिकता’’ व्यक्त की और ‘दसवंध’ या ‘तिथे’ (किसी आय या उपज का दसवां हिस्सा) के सिद्धांत के खिलाफ बार-बार ‘‘आपत्तिजनक’’ टिप्पणियां कीं जिसमें कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा पूजा स्थल को दान करने की प्रथा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ‘‘आपत्तिजनक वीडियो’’ का हवाला देते हुए गड़गज्ज ने दावा किया था कि सिख गुरुओं और जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ मान की हरकतें अपमानजनक थीं। जत्थेदार ने कहा था कि मान के ‘‘सिख विरोधी’’ बयान सत्ता के अहंकार को दर्शाते हैं।
गड़गज्ज ने कहा कि चूंकि मुख्यमंत्री एक ‘पतित’ (एक सिख जो अपने बाल कटवाता है) हैं और उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश नहीं किया जा सकता है, इसलिए उन्हें अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए अकाल तख्त के सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाया गया है।