नयी दिल्ली
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 29 जनवरी, 2026 को यह स्पष्ट कर दिया कि पूर्व भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ कई महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर कोई रोक नहीं होगी। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने यह बयान तब दिया जब उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ दर्ज आरोपों और एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई की।
अदालत ने 21 अप्रैल, 2026 को मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की। इस दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने स्थगन का अनुरोध किया, जिस पर अदालत ने याचिका की सुनवाई स्थगित कर दी और निचली अदालत के रिकॉर्ड को अगली सुनवाई तक मंगवाने का आदेश दिया। बृज भूषण के वकील ने मुख्य वकील की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए स्थगन की मांग की, लेकिन अदालत ने इस पर सवाल उठाया और कहा, "आप इस पर बहस क्यों नहीं कर रहे हैं? आपने याचिका दाखिल की है, लेकिन इस पर एक बार भी बहस नहीं की गई है।"
अदालत ने साफ तौर पर कहा, “कोई रोक नहीं है। यह स्पष्ट किया जाता है कि निचली अदालत की कार्यवाही पर कोई स्थगन नहीं है।” इसका मतलब था कि बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ निचली अदालत में चल रही कार्यवाही निरंतर जारी रहेगी।
बृज भूषण शरण सिंह ने 2024 में उच्च न्यायालय का रुख किया था, यह दावा करते हुए कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पक्षपाती तरीके से जांच की और केवल पीड़ितों के बयानों को ही आधार बनाया, जो उनके खिलाफ बदला लेने की कोशिश कर रहे थे। सिंह ने यह भी कहा कि आरोपों की सत्यता की जांच किए बिना ही निचली अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया था।
निचली अदालत ने मई 2024 में बृज भूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न, धमकी देने और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप तय किए थे। इस मामले में सह-आरोपी विनोद तोमर, जो डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव हैं, के खिलाफ भी आपराधिक धमकी का आरोप तय किया गया था। मई 2023 में दिल्ली पुलिस ने उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद बृज भूषण के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।




