Nearly 40% of restaurants in Kerala are on the verge of closure due to LPG shortage.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बाद उत्पन्न एलपीजी की कमी के कारण केरल में करीब 40 प्रतिशत रेस्तरां बंद होने की स्थिति में हैं, क्योंकि कई प्रतिष्ठान खाना पकाने के वैकल्पिक तरीकों का तुरंत इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। यह जानकारी उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने दी।
एलपीजी की कमी से रेस्तरां के अलावा कैटरिंग सेवाएं, छात्रावास, कैंटीन और शवदाह गृह भी प्रभावित हुए हैं।
‘केरल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन’ के अध्यक्ष जी. जयपाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि शुक्रवार तक राज्य में लगभग 40 प्रतिशत रेस्तरां बंद हो जाएंगे।
उन्होंने बताया, ‘‘ बृहस्पतिवार तक करीब 20 प्रतिशत रेस्तरां बंद हो चुके थे। शुक्रवार तक यह संख्या बढ़कर 40 प्रतिशत हो जाएगी क्योंकि एलपीजी का भंडार जल्द खत्म हो जाएगा।’’
केंद्र और राज्य सरकारों ने खाना पकाने के वैकल्पिक तरीके अपनाने की सलाह दी है लेकिन संगठन का कहना है कि शहरी क्षेत्रों के होटलों में लकड़ी से खाना बनाना व्यावहारिक नहीं है।
जयपाल ने कहा कि खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत अधिकतर शहरी रेस्तरां में आधुनिक रसोई प्रणाली अपनाई गई है। वहां लकड़ी या अन्य ईंधनों से खाना बनाने की व्यवस्था नहीं है। शहरी क्षेत्रों के रेस्तरां इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी एलपीजी आपूर्तिकर्ता सिलेंडर के लिए लगभग दोगुनी कीमत वसूल रहे हैं और पिछले दो दिन में ईंधन लकड़ी की कीमत भी काफी बढ़ गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘ कासरगोड में हमारे एक सदस्य को 17 किलोग्राम का निजी एलपीजी सिलेंडर 3,000 रुपये में मिला जबकि सामान्य तौर पर 19 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत करीब 1,800 रुपये होती है। लकड़ी के दाम भी बहुत बढ़ गए हैं और वैकल्पिक व्यवस्था अपनाना आसान नहीं है।’’
जयपाल ने कहा कि अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के तुरंत बाद सरकार लोगों को संभावित कमी के बारे में आगाह कर देती, तो स्थिति बेहतर ढंग से संभाली जा सकती थी।